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दागी विधायक भी बढ़े और करोड़पति भी

 सोमवार, 12 मार्च, 2012 को 05:32 IST तक के समाचार
 एमएलए

सबसे अधिक दागी विधायक उत्तर प्रदेश से हैं

अगर आप यह सोचते हैं कि राजनीति में दागी लोगों की संख्या कम हो रही है तो आप की सोच गलत है. उत्तर प्रदेश और पंजाब के नए विधायकों की सूची में सामने आया है कि यह संख्या दरअसल बढ़ी है.

कुछ दिन पहले समाप्त हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में चुने गए विधायकों में से एक-तिहाई विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के विधायक हैं.

पांच राज्यों के कुल 690 विधायकों में से 35 प्रतिशत यानी 252 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. साल 2007 के मुकाबले यह आठ प्रतिशत अधिक है.

बात सिर्फ ये नहीं कि केवल आपराधिक छवि के लोग राजनीति में सफल हो रहें हैं, दिन ब दिन अमीर लोगों के राजनीति में सफल होने की संभावना भी बढ़ती जा रही है.

ऐसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और नेश्नल इलेक्शन वॉच द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार इनमें से 457 विधायक यानी 66 प्रतिशत करोड़पति हैं.

करोड़पति विधायकों की संख्या में साल 2007 से अब तक 32 प्रतिशत वृद्धि हुई है.

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में कुल 189 विधायकों यानी 46 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. साल 2007 में यह संख्या 140 यानि 34 प्रतिशत थी.

बीकापुर से चुने गए समाजवादी पार्टी के मित्र सेन के खिलाफ सबसे अधिक 36 आपराधिक मामले दर्ज हैं.

राज्य में करोड़पति विधायकों की बात करें तो 2007 के 124 विधायकों की तुलना में इस बार 271 विधायक यानि 67 प्रतिशत करोड़पति हैं.

राज्य में सबसे अमीर हैं कांग्रेस के सुआर से विधायक नवाब काजिम अली जिन्होंने 56.89 करोड़ रुपए की संपत्ति की घोषणा की है.

पंजाब का हाल

पंजाब में भी करोड़पति और दागी विधायकों की संख्या में वृद्धि हुई है. पिछली विधानसभा में जहां 117 में से 21 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे, नए चुने गए विधायकों में से 22 ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

चुनावों पर नजर रखने वाले गैर-सरकारी संगठन 'पंजाब इलेक्शन वॉच' के अनुसार इनमें से आठ के खिलाफ गंभीर किस्म के आपराधिक मामले दर्ज हैं.

इन 22 विधायकों में से सबसे अधिक 11 कांग्रेस के हैं, नौ शिरोमिणी अकाली दल के और दो आजाद हैं.

सबके पास 10-10 करोड़

करोड़पति विधायकों की संख्या में भी भारी वृद्धि देखने को मिली है. जहां पिछली विधानसभा में 77 विधायक यानि 66 प्रतिशत करोड़पति थे इस बार यह संख्या बढ़ कर 101 यानी 86 प्रतिशत हो गई है.

इनमें से सबसे अधिक 47 अकाली दल से हैं, 41 कांग्रेस से हैं, 10 भारतीय जनता पार्टी के हैं और तीन निर्दलीय विधायक हैं. केवल 16 विधायक ही ऐसे हैं जो करोड़पति नहीं हैं.

लेकिन करोड़पति विधायकों की संपत्ति केवल एक-दो करोड़ ही नहीं है.

कांग्रेस के हर विधायक के पास औसतन 13.97 करोड़ की संपत्ति है. अकाली दल की टिकट पर चुने गए विधायकों की औसत संपत्ति 7.93 करोड़ रुपए है जबकि बीजेपी के विधायक के पास औसतन 4.68 करोड़ की संपत्ति है.

पंजाब के हर विधायक के पास औसतन 9.92 करोड़ की संपत्ति है.

बादल सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे सुखबीर बादल की कुल संपत्ति 90.86 करोड़ है. जलालाबाद से दोबारा चुने गए सुखबीर बादल की पिछले चुनाव में संपत्ति 67.98 करोड़ रुपए थी.

इसी तरह से कांग्रेस के केवल ढिल्लों की पिछले चुनाव में संपत्ति तो 6.83 करोड़ रुपए थी लेकिन इस चुनाव से पहले यह बढ़कर 78.51 करोड़ हो गई.

आयकर

नए चुने गए विधायकों में से 12 का कहना है कि उन्होंने कभी आयकर रिटर्न नहीं भरा है. इनमें से चार ने अपने शपथ पत्रों में पैन कार्ड का विवरण नहीं दिया है.

चुने गए विधायकों में से आधे से ज्यादा यानी 64 विधायक स्नातक हैं.

इन चुनावों में कुल 93 महिला उम्मीदवार थी लेकिन केवल 14 ही जीत पाईं. इसका मतलब यह कि 117 विधायकों की विधानसभा में केवल 12 प्रतिशत ही महिलाएं होंगी.

पांच राज्यों में मणिपुर एकमात्र राज्य है जहां किसी भी विधायक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.

उत्तराखंड में 22 प्रतिशत यानी 19 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि कुल 32 विधायक करोड़पति हैं. पिछली विधानसभा में यह संख्या क्रमश 17 और 12 थी.

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