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आख़िरी चरण में कई नेताओं की नाक की लड़ाई

 शनिवार, 3 मार्च, 2012 को 05:22 IST तक के समाचार
आजम खान

आजम खान रामपुर से चुनाव लड़ रहे हैं

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के सातवें और आखिरी चरण में 10 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर होने वाले मतदान से पहले सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं और इलाके के लोग मतदान को लेकर बेहद उत्साहित हैं.

इस चरण में विभन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलाकर कुल 962 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनके भविष्य का निर्णय करने वाले मतदाताओं की संख्या एक करोड़ 80 लाख से अधिक है.

राज्य में पिछले सभी चरणों में जोरदार मतदान हुआ है और उम्मीद की जा रही है कि सातवें चरण में मतदान का प्रतिशत और बढ़ेगा.

शायद इसी कारण मतदान की पूर्व संध्या पर इलाके के शहरों में पुलिस बल और मतदान के लिए अपील करने वाली आवाजों का बोलबाला रहा.

सभी विधानसभा क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं. बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, पीलीभीत जैसे विधानसभा क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात हैं क्योंकि ये बड़े नेताओं के क्षेत्र हैं.

बदलाव

इस चरण में जिन स्थानों पर चुनाव हो रहे हैं, वहां पहले तीन फरवरी को ही मतदान होने थे लेकिन फिर इसे टाल कर मार्च में कर दिया गया.

इस कारण शुरुआती दौर के चुनावी प्रचार में यहां लोगों और नेताओं में उत्साह कम दिख रहा था लेकिन पिछले पांच दिनों में लोगों के उत्साह में बहुत तेज़ी आई है जिसका श्रेय चुनाव आयोग के प्रयासों को दिया जा रहा है.

"मैंने तय कर लिया है कि किसको वोट देना है और मैं तो सुबह जल्दी जाकर वोट डालूंगा. वोट देना हमारा कर्तव्य है और भले ही कुछ न होता हो वोट तो मैं दूंगा ही. क्या पता कुछ बदल ही जाए"

शहाब हाशमी

बरेली में इत्र की दुकान चलाने वाले शहाब हाशमी का कहना था, "मैंने तय कर लिया है कि किसको वोट देना है और मैं तो सुबह जल्दी जाकर वोट डालूंगा. वोट देना हमारा कर्तव्य है और भले ही कुछ न होता हो वोट तो मैं दूंगा ही. क्या पता कुछ बदल ही जाए."

रामपुर में युवाओं में ख़ासा जोश था और उनका कहना था कि वो इस बार वोट करने के लिए ज़रूर निकलेंगे.

सातवें चरण में हो रहे मतदान में आजम खान के अलावा भले ही कोई और दिग्गज नेता का नाम न जुड़ा हो लेकिन इस चरण का बेहद अधिक महत्व माना जा रहा है.

मजेदार बात ये है कि इन इलाकों से बसपा ने पिछले चुनावों में 27 सीटें जीती थीं लेकिन 2009 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो बसपा का सिर्फ एक सांसद चुना गया.

अगर लोकसभा चुनावों के आधार पर देखा जाए तो इन इलाकों में कांग्रेस के छह सांसद हैं लेकिन विधायक बहुत ही कम. इसी इलाके से जितिन प्रसाद, अजहरुद्दीन, प्रवीण ऐरन और जफर अली नकवी सांसद हैं और चुनावों में इनकी प्रतिष्ठा दांव पर कही जा सकती है.

नज़र

बिजनौर से लेकर पीलीभीत, बदायूं रुहेलखंड और तराई के इन इलाकों में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है और इन समुदाय के वोटों पर सभी राजनीतिक दलों की नज़र है.

शहाब हाशमी

शहाब हाशमी अपने वोट का महत्व समझते हैं

अंतिम कुछ दिनों में मुलायम सिंह, अखिलेश यादव, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी और मायावती ने जिस कदर अपनी ताकत तुनावों में झोंकी है उससे साफ है कि इन सीटों को लेकर सभी दल अत्यंत गंभीर हैं.

बिजनौर जनपद में आठ विधानसभा सीटें हैं जिसमें से सात बसपा के पास थीं. बसपा के लिए ये संख्या बरकरार रखना मुश्किल लग रहा है.

पीलीभीत में चार विधानसभा सीटें हैं जिन पर मेनका गांधी और वरुण गांधी का प्रभाव माना जाता रहा है लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार उन्हें कांग्रेस और सपा से टक्कर मिलेगी.

शाहजहांपुर में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन बेहतर होने की संभवाना जताई जा रही है जहां पर कुल छह विधानसभा सीटें हैं.

मुरादाबाद और उसके आसपास छह सीटें हैं. मुरादाबाद नगर में बसपा के उम्मीदवार संदीप अग्रवाल के लिए कठिन घड़ी है. अग्रवाल पिछले 18 वर्षों से विधायक रहे हैं. इलाके की अन्य सीटों पर भी बसपा का प्रभाव रहा है.

इसी तरह ज्योतिबाफुले नगर और लखीमपुर खीरी की 12 विधानसभा सीटों पर बसपा उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर मिलने वाली है.

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