राहुल को मिलेगा भट्टा परसौल का लाभ ?

 शनिवार, 25 फ़रवरी, 2012 को 16:31 IST तक के समाचार
राहुल गांधी (फ़ाईल फ़ोटो)

भट्टा-परसौल दौरे के बाद राहुल गांधी के बयान के कारण उनकी काफ़ी किरकिरी भी हुई थी.

पिछले साल कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी जब उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौल में ज़मीन विवाद के कारण पुलिस और किसानों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद किसानों से मिलने उनके घर पहुंचे तो इस ख़बर ने ख़ूब सुर्खियां बटोरीं लेकिन क्या अब उनको इसका कोई चुनावी फ़ायदा भी होगा ?

दिल्ली से सटा भट्टा परसौल गांव गौतमबुद्घनगर ज़िले के जेवर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री मायावती के गृह ज़िले गौतमबुद्धनगर में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं नोएडा, दादरी और जेवर. पिछले विधान सभा चुनाव (2007) में ज़िले की केवल दो सीटें दादरी और जेवर थीं लेकिन परिसीमन के बाद अब नोएडा तीसरी विधान सभा सीट बन गई है.

यहां 28 फ़रवरी को होने वाले छटे चरण के मतदान में वोट डाले जाएंगें.

ज़िले की तीनों सीटें मायावती और राहुल गांधी के लिए नाक की लड़ाई बन गई हैं.

ज़मीन अधिग्रहण

पिछले साल(2011) मई में भट्टा-परसौल गांव में भूमि-अधिग्रहण के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में दो पुलिस वाले समेत तीन लोग मारे गए थे.

पुलिस वाले की मौत हुई थी इसलिए पुलिस ने भी जवाबी कारर्वाई में गांव में घुसकर लोगों की पिटाई की. गावं वालों का कहना था कि पुलिस की डर से पुरूष गांव छोड़ कर भाग गए थे और पुलिस ने महिलाओं के ख़िलाफ़ काफ़ी बुरा व्यवहार किया था और कुछ लोगों ने तो बलात्कार तक की बात कही थी.

इस घटना के दो-तीन बाद राहुल गांधी अचानक प्रशासन को चकमा देकर एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर भट्टा परसौल गांव चले गए.

फिर क्या था कांग्रेस के सारे बड़े नेता वहां पहुंच गए. राहुल गांधी ने फिर कुछ दिन बाद किसानों की समस्या को उजागर करने के लिए अलीगढ़ तक पदयात्रा भी की.

राहुल के इस क़दम को इशारा समझते हुए कई कांग्रेसी नेताओं ने उस इलाक़े का दौरा करना शुरू कर दिया. कई नेताओं ने तो मायावती के पैतृक गावं बादलपूर में धरना प्रदर्शन भी किया.

मायावती की रैली

मायावती की रैली में भारी संख्या में उनके समर्थक हिस्सा ले रहें हैं.

बादलपूर गांव दादरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

कांग्रेस की मन्शा बिल्कुल साफ़ है कि मायावती को उनके घर में ही मात देने की कोशिश की जाए.

जेवर विधान सभा क्षेत्र से राहुल गांधी ने अपने क़रीबी समझेजाने वाले ठाकुर धीरेंद्र सिंह को कांग्रेसी प्रत्याशी बनाया है. वैसे तो राहुल गांधी पूरे राज्य में चुनाव प्रचार कर रहें हैं लेकिन जिन कुछ सीटों पर राहुल गांधी की ख़ास नज़र है, जेवर उनमें से एक है.

लेकिन ठाकुर धीरेंद्र सिंह की राह बहुत कठिन हैं क्योंकि यहां से बसपा उम्मीदवार मौजूदा विधायक और मंत्री वेदराम भाटी हैं.

कड़ी टक्कर

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही इसे राहुल गांधी और मायावती के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है लेकिन यहां से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को भी कमज़ोर नहीं आंका जा सकता है.

सपा उम्मीदवार विजेंद्र सिंह भाटी, पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह भाटी के छोटे भाई हैं. परिसीमन के बाद जेवर के कई गांवो में नरेंद्र सिंह की पकड़ मज़बूत है.

जेवर से भाजपा उम्मीदवार सुंदर सिंह राणा हैं लेकिन उनकी उम्मीदवारी का विरोध उनकी ही पार्टी के कई लोग कर रहें हैं इसलिए उनकी दावेदारी उतनी मज़बूत नहीं कही जा सकती है.

दादरी से बसपा प्रत्याशी सतवीर सिंह गुर्जर मायावती के काफ़ी क़रीबी माने जाते हैं. उनको चुनौती दे रहें हैं कांग्रेस के समीर भाटी. मज़े की बात ये है कि समीर पहले बसपा में थे और उनके पिता महेंद्र सिंह भाटी एक समय में दादरी के विधायक रह चके हैं.

राजकुमार भाटी यहां साइकिल की सवारी कर रहें है तो पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर यहां से कमल का फूल खिलाने की कोशिश कर हें हैं.

नवाब सिंह नागर दादरी से दो बार विधायक रह चुके हैं इसलिए उनकी दावेदारी भी मज़बूत मानी जा रही है.

परिसीमन के बाई नई सीट बनी नोएडा विधान सभा क्षेत्र से बसपा ने ओमदत्त को अपना प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने ........

सुनील चौधरी सपा की तरफ़ से मैदान में हैं तो भाजपा ने डॉक्टर महेश शर्मा को मैदान में उतारा है.

महेश शर्मा पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे लेकिन पार्टी ने उन्हें इस बार विधान सभा चुनाव लड़ने का आदेश दिया है.

कांग्रेस उम्मीदवार वीएस चौहान भी पेशे से डॉक्टर हैं. नई सीट होने के कारण किसी भी प्रत्याशी को कम नहीं आंका जा सकता है.

मायावती ने नोएडा में रैली के दौरान विकास के मुद्दे पर वोट मांगा तो राहुल गांधी ने अपनी जनसभा में एक दफ़ा फिर भट्टा-परसौल की याद दिलाते हुए कहा कि किसानों ने अपना अधिकार मांगा तो उन्हें गोलियां मिलीं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.