
पुलिस का कहना है कि गोलियां चलीं लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने गोलियों की आवाज ही नहीं सुनीं
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में गुरुवार सुबह हुई उस कथित पुलिस मुठभेड़ पर सवाल उठ रहे हैं जिसमें पांच लोग मारे गए थे.
पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में मारे गए लोग दो बैंक डकैतियों में शामिल थे.
पुलिस ने मुठभेड़ की जगह से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने का दावा भी किया है.
मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे फर्जी मुठभेड़ का मामला बता रहे हैं.
मारे गए लोगों में से चार बिहार के जबकि एक व्यक्ति पश्चिम बंगाल का रहने वाला था. मुठभेड़ की ये घटना चेन्नई के वेलाचेरी इलाके में स्थित एक घर में हुई.
रिपोर्टों में कहा गया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा और ओवरसीज़ बैंक की शाखाओं से हथियारबंद लोगों ने लगभग 66000 डॉलर लूटे थे.
रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि मामले की पड़ताल कर रही स्पेशल टीम ने लुटेरों को पकड़ने के लिए संदिग्ध लोगों की वीडियो तस्वीरें बुधवार को जारी की थीं.
पुलिस का कहना है कि इसके बाद इन लुटेरों के बारे में उन्हें लोगों के फोन आने लगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस आयुक्त जे के त्रिपाठी का कहना है कि दोनों बैंकों के कुछ लोगों को ये तस्वीरें दिखाईं गईं तो उन्होंने बताया कि ये लोग बैंक आए थे.
लेकिन पुलिस का ये दावा विवादों में गहरा गया है.
'गोलियों की आवाज नहीं सुनीं'
पुलिस का कहना है कि वो इन लोगों की पृष्ठभूमि जानने के लिए वेलाचेरी इलाके में गई थी जहां उस पर गोलियां चलाईं गईं जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलीबारी की.
मानवाधिकारों की पैरवी करने वाली सुधा रामालिंगम और संकरसुब्बु पुलिस के इस तर्क पर सवाल उठा रहे हैं.
उनका पूछना है कि पुलिस को जब इन लोगों की पहचान नहीं हुई थी तो वे घनी आबादी वाले इस इलाके में इतनी बड़ी संख्या में आखिर किस लिए गए थे.
वे इस घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग कर रहे हैं.
वेलाचेरी पहुंचे बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मुठभेड़ की घटना के बारे में विरोधाभासी बातें सामने आ रही हैं क्योंकि उन्होंने गोलियां चलने की आवाज नहीं सुनी.
एक स्थानीय व्यक्ति ने बीबीसी संवाददाता को बताया, हमें घर जाने और अपने दरवाजे बंद रखने के लिए कहा गया था.

















