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उत्तर प्रदेश चुनाव 2012: पांचवे चरण में 59.2 % मतदान

 गुरुवार, 23 फ़रवरी, 2012 को 20:35 IST तक के समाचार
मतदान

अभी तक हुए चार चरणों में मतदान भारी रहा है.

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के पांचवे चरण में इटावा और झांसी समेत 13 जिलों की 49 सीटों पर मतदान हुआ.

प्रदेश के पश्चिमी और बुंदेलखंड इलाके में हो रहे इस मतदान में 829 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करीब डेढ़ करोड़ मतदाता करेंगे.

शुरूआती अनुमानों के अनुसार इस चरण में 59.2 % मतदान हुआ.

इस चरण के मतदान में जो प्रमुख चेहरे चुनावी दंगल में हैं उनमें भारतीय जनता पार्टी की उमा भारती और उत्तर प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष शिवपाल सिंह यादव शामिल हैं.

जिन चुनाव क्षेत्रों में मतदान हो रहा है वे हैं: फिरोजाबाद, कांशीराम नगर, एटा, मैनपुरी, इटावा, औरैया, रमाबाई नगर, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा जिले हैं.

समाजवादी पार्टी के लिए अहम

चरखारी से पंकज प्रियदर्शी का ब्यौरा

कानपुर से चरखारी तक का सफर क़रीब छह घंटे में पूरा हुआ. इस दौरान बांदा से महोबा और फिर महोबा से चरखारी तक के इलाक़ों को नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला.

बांदा से महोबा तक का रास्ता बहुत ख़राब है. कई जगह सड़के बहुत ख़राब हैं और ग़रीबी साफ़-साफ़ दिखती है. कई इलाक़ों में सूखे का प्रभाव है, तो कई में पीने के पानी की समस्या है. युवकों को रोज़गार के अवसर नहीं मिल रहे और हर कोई विकास की मांग कर रहा है.

बुंदेलखंड के लिए केंद्र की ओर से पैकेज की घोषणा तो हुई है, लेकिन ज़मीन पर इसका असर कम ही देखने को मिलता है. पाँचवें चरण में बुंदेलखंड के पाँच ज़िलों झाँसी, जालौन, महोबा, ललितपुर और हमीरपुर में मतदान होगा.

जानकारों के मुताबिक इस इलाके में चुनाव मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी के लिए काफी अहम रहने की उम्मीद है.

ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि इस इलाके में करीब 13% मतदाता यादव समुदाय के हैं जिनका एक बड़ा हिस्सा समाजवादी पार्टी का समर्थक रहा है.

हालांकि पिछले कुछ चुनावों में मुलायम सिंह यादव के हाथ से यादव वोटों का कुछ प्रतिशत फिसला था और इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी पार्टी ने इलाके में प्रचार करने में शायद ही कोई कसर छोड़ी हो.

कांग्रेस और बसपा की आस

इस इलाके में प्रदेश में सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी की भी पैनी नज़र रहेगी.

2007 में हुए विधान सभा चुनावों में बसपा की तूती बोली थी. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि पिछले लोक सभा चुनावों में बसपा को इस क्षेत्र से निराशा ही हाथ लगी थी.

हालांकि बुंदेलखंड इलाके पर पिछले काफी समय से कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी की भी नज़र रही है और इलाके में उनके दौरे भी कम नहीं हुए हैं.

गौर करने वाली बात यह भी रहेगी कि क्या इस इलाके में भी मतदान का प्रतिशत अभी तक हुए भारी मतदान के आस-पास ही रहेगा.

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