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वाह रे, बिहार की ' ग्लोबल मीट ' !

 शुक्रवार, 17 फ़रवरी, 2012 को 06:33 IST तक के समाचार
बिहार ग्लोबल मीट

इस सम्मेलन में नेपाल के प्रधानमंत्री भी शामिल हो रहे हैं.

पांच साल बाद शुक्रवार को पटना में फिर शुरू हो रहा है तीन दिनों का विचार मंथन. ये सोचने के लिए कि बिहार कैसे आगे बढे और फले फूले.

राज्य की नीतीश सरकार महीनों पहले से इस प्रचार में जुटी है कि बड़ा भारी आयोजन होने जा रहा है. शायद इसलिए नाम भी इसका भारी अंग्रेज़ी में रखा गया है - ' ग्लोबल सम्मिट ऑन चेंजिंग बिहार '. यानी बदलते बिहार पर वैश्विक समागम.

वर्ष 2007 में भी इसी तरह सिर्फ विचार मंथन के लिए 'ग्लोबल मीट फॉर रिसर्जेन्ट (पुनरुत्थान) बिहार ' का आयोजन हुआ था. उस के परिणाम- शून्य हो जाने को लेकर लोग मज़ाक में कहने लगे थे - '' खोदा पहाड़, लेकिन चुहिया भी नहीं निकली.''

उस ' ग्लोबल मीट ' का उदघाटन तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने किया था. बाद में तो उस आयोजन के ख़र्च में कथित घपले की चर्चा ज़्यादा हुई, जबकि बजट सिर्फ पचास लाख रूपए का ही था.

'क्या मिलेगा बिहार को'

इसबार लगभग तीन करोड़ रूपए इस मद में ख़र्च करने का सरकारी निर्णय हुआ है. पिछले अनुभव से चिढ़े हुए लोग यह सवाल खुलकर पूछ रहे हैं कि ऐसे बुद्धि- विलास वाले आयोजन से बिहार को मिलेगा क्या ?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहते हैं कि ये कोई उद्योग-धंधा लगाने या पूंजी-निवेश सुनिश्चित कराने जैसा सम्मलेन नहीं है, बल्कि विकास के नए रास्ते सुझाने के लिए चिंतन-मनन करने वाले जानकारों का समागम है और इसका लाभ भी मिलेगा.

दूसरी तरफ़ विरोधी दलों का आरोप है कि नीतीश कुमार अपना 'ग्लोबल प्रचार -सुख' पाने के लिए इस ग़रीब राज्य का पैसा ऐसे पिकनिक नुमा समारोह में उड़ा रहे हैं.

माहिर लोगों का जमावड़ा

वैसे, इसमें भाग लेने वालों की सूची इतनी वजनदार है कि लगता है अर्थशास्त्र , समाजशास्त्र, राजनीति, फ़िल्म और पत्रकारिता से जुड़े माहिर लोग बिहार के कायापलट का रास्ता सुझाकर ही दम लेंगे.

नेपाल के प्रधानमंत्री बाबू राम भट्टाराई इस ' ग्लोबल सम्मिट' का उदघाटन करेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव भी यहाँ होंगे. साथ ही मोंटेक सिंह अहलुवालिया, मेघनाद देसाई, कुमार मंगलम बिड़ला समेत कई अन्य देशी-विदेशी हस्तियाँ इसमें हिस्सा लेने आ रही हैं.

कुल मिलाकर मामले को बड़ा ही ' हाई-फाई ' बनाकर दिखाया जा रहा है. लेकिन इससे हासिल क्या होगा के सवाल पर वही ढाक के तीन पात वाली आशंका फिर से घिर आती है.

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