
सिब्बल ने कहा कि अदालत ने वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ टिप्पणी नहीं की है.
केंद्रीय संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि 2जी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ नही है.
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम के सभी 122 लाइसेंसों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है.
अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले की सीबीआई जाँच पर केंद्रीय सतर्कता आयोग को निगरानी करने के लिए कहा है. अदालत ने इसके लिए विशेष जांच दल के गठन की मांग को ख़ारिज कर दिया है.
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से 'इस विषय पर अपनी चुप्पी तोड़ने' को कहा है. साथ ही भाजपा ने एक बार फिर क्लिक करें चिदंबरम से इस्तीफ़े की मांग की है. सीपीएम ने भी एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री से विषय पर कुछ बोलने का आहवान किया है.
लेकिन कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत ने ना तो उस समय के वित्त मंत्री और ना ही प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कोई टिप्पणी की है.
फ़ैसले का स्वागत
"सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वित्त मंत्रालय की इसमें कोई ग़लती नहीं थी. वित्त मंत्रालय ने जो राय दी थी उसे माना नहीं गया. चिदंबरम का इस्तीफ़ा मांगने वाली बीजेपी को ख़ासतौर पर इस बात पर माफ़ी मांगनी चाहिए क्योंकि अब तो अदालत ने कहा है कि उस मामले में वित्त मंत्रालय की कोई ग़लती नहीं थी. "
कपिल सिब्बल
उन्होंने कहा कि वे अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हैं क्योंकि अब टेलीकॉम क्षेत्र में लाइसेंसिंग के बारे स्थिति साफ़ हो गई है.
कपिल सिब्बल ने कहा, हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं. अदालत ने इस नीति पर स्पष्टीकरण किया है कि भारत में स्पैक्ट्रम का आवंटन सिर्फ़ नीलामी के ज़रिए होना चाहिए. और पहले आओ पहले पाओ की नीति 2003 से ही ग़लत थी. अब आने वाले दिनों कोई असमंजस नहीं रहेगा.
उन्होंने कहा कि नीति की ग़लती की शुरूआत एनडीए सरकार के दिनों से हुई थी.
कपिल सिब्बल ने कहा कि अदालत ने स्पैक्ट्रम के आवंटन को ग़लत ठहराया है लेकिन इसके लिए उस समय के मंत्री को ज़िम्मेदार माना है ना कि सरकार को.
'वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ टिप्पणी नहीं'
सिब्बल ने कहा, ना तो प्रधानमंत्री और ना ही वित्त मंत्री के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कोई टिप्पणी की है.
"अदालत के फ़ैसले के मद्देनज़र प्रधानमंत्री को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए. सीपीएम मांग करती है कि सरकार अदालत के निर्णय को तुरंत लागू करे."
सीपीएम पोलितब्यूरो का बयान
कपिल सिब्बल ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया, अदालत का फ़ैसला मेरे मंत्री पद ग्रहण करने के बाद की नीतियों के अनुकूल है. तब मैंने कहा था कि हम टेलीकॉम लाइंसेस देने और स्पैक्ट्रम के आवंटन के अलग कर देंगे.
उन्होंने कहा कि अब टेलीकॉम क्षेत्र में और अधिक निवेश आएगा. लेकिन विपक्ष सरकार के बचाव से बिल्कुल भी सहमत नहीं दिख रहा है.
सीपीएम नेता निलोत्पल बासु ने कहा है कि अदालत के फ़ैसले से सरकार घेरे में आ गई है.
सीपीएम पोलितब्यूरो ने एक बयान में कहा, अदालत के फ़ैसले के मद्देनज़र प्रधानमंत्री को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए. सीपीएम मांग करती है कि सरकार अदालत के निर्णय को तुरंत लागू करे.
उधर अदालत के फ़ैसले से सीख मिलने के बारे में सिब्बल ने पत्रकारों को बताया, हमने अदालत के फ़ैसले से ये सीख ली है कि हर मंत्री को सब से सलाह करने के बाद आगे बढ़ना चाहिए. और कोई अनियमितता नहीं करनी चाहिए.
सिब्बल ने कहा कि अदालत ने कहा है कि उस समय के मंत्री ने वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के सुझावों को नज़रअंदाज़ किया है.
‘चिदंबरम आवंटन में शामिल नहीं थे’
उन्होंने कहा कि 2जी स्पैक्ट्रम के आवंटन में कभी भी पी चिदंबरम शामिल नहीं थे.
उस समय के वित्त मंत्री पी चिदंबरम का बचाव करते हुए सिब्बल ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वित्त मंत्रालय की इसमें कोई ग़लती नहीं थी. वित्त मंत्रालय ने जो राय दी थी उसे माना नहीं गया. चिदंबरम का इस्तीफ़ा मांगने वाली बीजेपी को ख़ासतौर पर इस बात पर माफ़ी मांगनी चाहिए क्योंकि अब तो अदालत ने कहा है कि उस मामले में वित्त मंत्रालय की कोई ग़लती नहीं थी.
कपिल सिब्बल ने प्रेसवार्ता में बार-बार दोहराया कि अगर आवंटन की नीति ग़लत है तो इसकी शुरूआत एनडीए सरकार के कार्यकाल से हुई थी.

















