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इमरान ख़ान के कार्यक्रम में बत्ती गुल

 मंगलवार, 31 जनवरी, 2012 को 12:57 IST तक के समाचार

इमरान ख़ान की एक झलक देखने के लिए पुस्तक सम्मेलन में भारी भीड़ जमा हो गई थी.

किसी महत्वपूर्ण शख़्सियत के लंबे खिंचते कार्यक्रम को बीच में रोकने का सबसे बेहतर तरीका क्या है? कोलकाता पुस्तक मेले के आयोजकों की मानें तो वह तरीका है बिजली गुल कर देना.

सोमवार को इस पुस्तक मेले में आयोजित कोलकाता साहित्य सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान और राजनीतिज्ञ इमरान खान के कार्यक्रम में बिजली चली गई.

इमरान सम्मेलन में अपनी पुस्तक ‘कैप्टेनिंग ए नेशन’ के कुछ हिस्से पढ़ने और श्रोताओं से बातचीत के लिए आए थे जब अचानक अंधेरा हो गया.

आयोजक संगठन पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड के सचिव त्रिदीव चटर्जी ने कहा, “इमरान ख़ान तय समय से 45 मिनट देरी से पहुंचे थे. अपनी पुस्तक के कुछ हिस्सों को पढ़ने के बाद वहां मौजूद पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछना शुरू किया. कार्यक्रम लंबा खिंचने की वजह से ही कुछ देर के लिए बिजली गुल करने का फैसला किया गया.”

नाराज़ दिखे इमरान

कोलकाता पुस्तक मेले के साहित्य सम्मेलन और उसके बाद टाइगर पटौदी मेमोरियल लेक्चर में इमरान को सुनने के लिए भारी तादाद में लोग जुटे थे.

"इमरान खान तय समय से 45 मिनट देरी से पहुंचे थे. कार्यक्रम लंबा खिंचने की वजह से ही कुछ देर के लिए बिजली गुल करने का फैसला किया गया."

त्रिदीव चटर्जी, सचिव,आयोजक संगठन, पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड

इमरान को सुनने की जितनी ललक आम लोगों और साहित्यप्रेमियों में थी, उससे कहीं ज्यादा उत्साह उनको अपने कैमरों में कैद करने के लिए वहां जुटे फ़ोटोग्राफ़रों में था.

बिजली गुल होने के बाद इमरान ख़ान कुछ देर तक तो अंधेरे में ही खड़े रहे. उसके बाद नाराज़ दिख रहे इमरान अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मंच से नीचे उतर आए.

उनके मेले से जाने के फ़ौरन बाद बिजली आ गई.

जब तक मेले के आयोजकों ने बिजली गुल होने की असली वजह नहीं बताई, इसे तकनीकी गड़बड़ी ही माना जाता रहा.

त्रिदिव चटर्जी ने बताया, “पांच मिनट के लिए तय प्रेस वार्ता 45 मिनट तक खिंच गई थी, ऑडिटोरियम में भीड़ बढ़ती जा रही थी और कार्यक्रम ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था, उसी जगह एक दूसरा कार्यक्रम भी होना था इसलिए इस तरीके का सहारा लेना पड़ा”.

अब पब्लिशर्स एंड बुकसेलर्स गिल्ड के बत्ती गुल करने के फ़ैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है. आलोचकों का कहना है कि विशिष्ट अतिथि के साथ ऐसा बर्ताव करने की जगह उन्हें प्रेस व्राता जल्दी खत्म करने का अनुरोध भी किया जा सकता था.

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