
नंदन नीलेकणी आधार परियोजना का काम देख रहे हैं
हर भारतीय को विशिष्ट पहचान नंबर और पहचान पत्र देने वाली योजना को लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति की शुक्रवार को अहम बैठक होगी.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में समिति की बैठक होगी जिसमें गृह मंत्रालय और योजना आयोग के बीच खींचतान दूर करने की कोशिश होगी.
दरअसल विवाद सभी नागरिकों का बायोमेट्रिक आँकड़ा जुटाने को लेकर है. बायोमेट्रिक यानी ऐसे शारीरिक या व्यावहारिक गुण जो व्यक्ति की पहचान कराते हैं.
ख़बरों के अनुसार गृह मंत्रालय का कहना है कि भारत के महापंजीयक या रजिस्ट्रार जनरल को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के ज़रिए ये आँकड़े जुटाने का काम पहले ही दिया जा चुका है.
मगर नंदन नीलेकणी के नेतृत्त्व में विशिष्ट पहचान नंबर वाली 'आधार' योजना को भी ये आँकड़े जुटाने के लिए अधिकृत किया गया है.
विश्वसनीयता
इस मसले पर बुधवार को भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बैठक बुलाई थी जिसमें वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, गृह मंत्री पी चिदंबरम्, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, आधार परियोजना के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी और प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन शामिल थे.
गृह मंत्रालय इस बात से भी चिंतित है कि जो भी आँकड़े आधार योजना के तहत जुटाए जा रहे हैं वे बाहरी एजेंसी के ज़रिए जुटाए जा रहे हैं और ऐसे में उनकी विश्वसनीयता पूरी तरह सुनिश्चित नहीं की जा सकती.
मगर विशिष्ट पहचान नंबर प्राधिकरण को कई लोगों का समर्थन भी प्राप्त है. शुरुआत में इस परियोजना के तहत 20 करोड़ लोगों को ही कार्ड देने या पहचान पत्र देने की योजना थी मगर अब उनके अधिकार व्यापक करके सभी को उसमें शामिल किया जा रहा है.
अब ऐसे में सारी जानकारी जुटाने के काम में 'आधार' योजना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के काम में एक दूसरे से कैसे अलग रखे जाएँ फ़िलहाल ध्यान इसी पर है.

















