
भाजपा की सारी उम्मीदें खंडूरी से हैं लेकिन क्या कोश्यारी और निशंक उन्हें अपना पूरा सहयोग देंगे.
उत्तराखंड में चुनाव प्रचार चरम पर हैं. यहां विधानसभा की 70 सीटों के लिए 30 जनवरी को मतदान होना है और इसके लिए कुल 812 उम्मीदवार मैदान में हैं.
जैसे-जैसे चुनाव के दिन क़रीब आ रहें हैं, चुनावी गहमागहमी तेज़ होती जा रही है. वोटरों को रिझाने के लिए सभी पार्टियों ने अपने स्टार प्रचारकों को यहां भेजा है.
भाजपा और कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की 40-40 नामों की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी है.
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की ओर से लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और नितिन गडकरी के अलावा फ़िल्मी अदाकार शत्रुघ्न सिन्हा और हेमा मालिनी प्रचार में जुटे हैं.
प्रमुख विपक्षी कांग्रेस की तरफ़ से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा कई केंद्रीय मंत्री और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मैदान में हैं.
भ्रष्टाचार
"खंडूरी की अगुवाई में चुनाव लड़ा जा रहा है वही मुख्यमंत्री भी होंगे अगर भाजपा सत्ता में आती है."
बीजेपी के चुनाव प्रभारी राजनाथ सिंह
भाजपा ने अपनी सारी उम्मीदें मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी से लगा रखीं हैं, क्योंकि भाजपा ने इस बार चुनावी नारा दिया है 'खंडूरी है ज़रूरी'.
भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में सिर्फ़ खंडूरी ही छाए हुए हैं जबकि कोश्यारी और निशंक जैसे राज्य के दूसरे नेताओं को बैककवर पर ही जगह मिल पाई है.
खंडूरी की कथित साफ़ छवि को भुनाने की नीयत से ही घोषणा पत्र जारी करने के समय भाजपा के चुनाव प्रभारी राजनाथ सिंह ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि खंडूरी की अगुवाई में चुनाव लड़ा जा रहा है, वही मुख्यमंत्री भी होंगे अगर भाजपा सत्ता में आती है
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में उत्तराखंड को आंदोलनकारियों के सपनों के मुताबिक़ कथित रूप से आदर्श और संस्कारी राज्य बनाने का वादा किया है.

कांग्रेस की तरफ़ से सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ही राज्य का दौरा कर तुके हैं.
वहीं कांग्रेस और दूसरे विरोधी दलों का सवाल ये है कि अगर खंडूरी इतने ही ज़रूरी थे तो आख़िरकार उन्हें हटाया ही क्यों गया था.
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के अलावा मतदाताओं से और ढेर सारे वादे किए हैं.
पार्टी का चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए कांग्रेस के प्रभारी चौधरी वीरेंद्र सिंह का कहना था, हाल के दिनों में सबसे चर्चित मुद्दा रहा है भ्रष्टाचार का और कांग्रेस एक ईमानदार और पारदर्शी प्रशासन तंत्र विकसित करेगी.
"हाल के दिनों में सबसे चर्चित मुद्दा रहा है भ्रष्टाचार का और कांग्रेस एक ईमानदार और पारदर्शी प्रशासन तंत्र विकसित करेगी."
कांग्रेस के प्रभारी चौधरी वीरेंद्र सिंह
उन्होंने आगे कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो बेरोज़गारों के लिए प्रति माह भत्ता बढ़ाकर 1500 रू कर दिया जाएगा, बेरोज़गार महिलाओं के लिए ये 2200 होगा, महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा, किसानों और उद्योगों के लिए 24 घंटे बिजली की आपूर्ति होगी और राज्य की दोनों प्रमुख बोलियों गढ़वाली और कुमांऊनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज कराया जाएगा.
पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पांचों सीट हार जाने के बाद कांग्रेस की उम्मीदें बढ गईं हैं.
मुख्य मुक़ाबला तो भाजपा और कांग्रेस के बीच में ही है लेकिन बहुजन समाज पार्टी भी अपनी पूरी ताक़त लगा रही है. इस समय बसपा के आठ विधायक हैं और बसपा अपनी सीटों की संख्या को बढ़ाने के लिए जी-जान से जुटी है.
पार्टी की इकलौती स्टार प्रचारक उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती राज्य का तूफ़ानी दौरा कर चुकी हैं.


















