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'मृत आदिवासी को प्रताड़ित किया गया'

 सोमवार, 16 जनवरी, 2012 को 09:17 IST तक के समाचार

स्कूली शीक्षिका सोनी सोरी की पुलिस हिरासत में कथित प्रताड़ना का मामला अब तक ठंडा नहीं हुआ है. इसी बीच छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित सुकमा के एक थाने में हुई एक आदिवासी की मौत पर फिर घिरती नज़र आ रही है.

सामाजिक और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पोडियामी माड़ा नाम के व्यक्ति को पुलिस घर से पकड़ कर ले गई थी और बाद में यातनाएं देने से उनकी मौत हो गई. मेडिकल जाँच के मुताबिक उनके गुप्तांगों में चोट और जलने के निशान हैं.

पुलिस का कहना है कि पूरी कारवाई केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की है जबकि केंद्रीय बल के अधिकारी कह रहे हैं कि पोडियामी माड़ा को शुक्रवार को पकड़ने के बाद उसी दिन उसे सुकमा पुलिस के हवाले कर दिया गया था.

पुलिस के मुताबिक पोडियामी माड़ा को पिछले शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था. फिर उसे सुकमा थाने लाया गया जहाँ उसने कथित रूप से फांसी लगाकर 'आत्महत्या' कर ली.

आरोप-प्रत्यारोप

पुलिस कहती है कि जो शॉल पोडियामी माड़ा नें ओढ़ रखी थी उसी से उसने फांसी लगा ली. पुलिस के मुताबिक पोडियामी माड़ा को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ के एक दल ने नीलावाराम और मुरतुंडा के बीच के जंगलों से पकड़ा था.

पोडियामी माड़ा को माओवादी छापामारों के दल का एरिया कमांडर बताया गया. मगर स्थानीय विधायक कवासी लकमा ने आरोप लगाया है कि माड़ा को उसके गाँव गादिरस से घर से पकड़ कर ले जाया गया.

माड़ा के परिवार वालों का कहना है कि पिछले सोमवार को ही पुलिस का दल उसे अपने साथ ले गया था. कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मनीष कुंजम का आरोप है कि पोडियामी माड़ा को बिजली के झटके और दूसरी तरह की यातनाएं दी गईं.

अब पुलिस इस पूरे मामले से अपना पल्ला यह कहते हुए झाड़ रही है कि ये मामला केंद्रीय रिज़र्व पुलिस से जुड़ा है और इससे स्थानीय पुलिस का कोई लेना देना नहीं है.

पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि पोडियामी माड़ा को शुक्रवार 8.30 बजे सुबह थाने लाया गया और उसकी मौत एक घंटे के बाद ही हो गई.

इस मामले में सुकमा थाने के एक सहायक पुलिस निरीक्षक सहित चार पुलिस वालों को निलंबित किया गया है.

मगर पोडियामी माड़ा की मेडिकल रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं वह काफी चौंका देने वाले हैं. डॉक्टर आरपीएस पैकर द्वारा की गई जांच में पाया गया कि उसके गुप्तांगों में चोट और जलने के निशान हैं. यह परीक्षण पोडियामी माड़ा के मरने के बाद किया गया था.

इससे पहले भी एक मुखिया को नक्सली कहकर मुठभेड़ में मारने की बात को लेकर काफी विवाद हुआ था.

लोगों के विरोध के बाद स्थानीय प्रशासन नें मुखिया के शव को कब्र से निकलवाकर उसकी मेडिकल जांच करवाई थी. यह मामला भी सुकमा का ही था.

सोनी सोरी के मामले में भी इसी तरह के प्रताड़ना की बात सामने आई थी. तब पुलिस ने कहा था कि वह अस्पताल के बाथरूम में फिसल कर गिर गई थी इस लिए उसे चोट आई.

मगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सोनी सोरी का मेडिकल परिक्षण कोलकाता के नीलरतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में किया गया. सोनी के वकील के मुताबिक मेडिकल जांच से पता चला है कि सोनेी के गुप्त अंगों में कंचे डाले गए थे.

यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और छत्तीसगढ़ की सरकार को इस पर अपना पक्ष रखना है.

सोनी का मामला

हाल ही में कुछ महिला संगठनों की प्रतिनिधियों ने सोनी सोरी से जेल में मुलाक़ात करने की कोशिश की थी. मगर सरकार नें उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी.

फिलहाल विपक्षी दल कांग्रेस, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मानवाधिकार संगठन पोडियामी माड़ा के मौत की न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं.

सोमवार यानी 16 जनवरी को सुकमा दंतेवाड़ा से अलग होकर एक नए ज़िले के रूप में काम करने लगेगा.

इसके उदघाटन में मुख्यमंत्री रमन सिंह और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश शामिल हो रहे हैं. मगर पोडियामी माड़ा के मौत से सुकमा जिले की शुरुआत उन दावों पर सवालिया निशान खड़े करती है कि नए ज़िले लोगों के दिल जीतने के लिए बनाए जा रहे हैं.

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