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ज़हरीली शराब बनाने या बेचने पर मौत की सज़ा

 मंगलवार, 6 दिसंबर, 2011 को 16:59 IST तक के समाचार
ज़हरीली शराब

पिछले सालों में राज़्य में ज़हरीली शराब पीने से कई लोग मारे जा चुके हैं.

गुजरात में ग़ैर-क़ानूनी तरीके से ज़हरीली शराब को बनाने और बेचने की सज़ा अब मौत होगी.

दो साल से ज़्यादा समय तक बिल अपने पास रखने के बाद राज्यपाल कमला बेनीवाल ने नए कानून को मंज़ूरी दे दी है.

राज्य में ज़हरीली शराब पीने से कई लोग मारे जा चुके हैं.

बीबीसी से बातचीत में गुजरात के कानून मंत्री दिलीपभाई संघानी ने कहा, ''जो जानबूझ कर दारू की मिलावट ऐसी चीज़ों के साथ करके बेचेगा जिससे किसी की जान पर ज़ोखिम हो या जान चली जाए, तो दारू बनाने वाले और बेचने वाले को नए कानून से मृत्यूदंड की सज़ा तक हो सकती है.''

उन्होंने कहा, ''गवर्नर ने पुन: इस को वापिस भेजा था. लेकिन गांधीजी के गुजरात में नशेबंदी को लागू करने के लिए विधानसभा ने इसे फिर पारित किया.''

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को नशाबंदी लागू करने वाले राज्यों को इसकी वजह से हो रहे नुकसान की भरपाई करनी होती है मगर वह ऐसा नहीं कर रही. ''लेकिन हमारे लिए लोगों की जान का ज़्यादा महत्व है.''

नियमों के बाद होगा लागू

मंत्री ने कहा कि हालांकि राज्यपाल की सहमति के बाद अब यह कानून बन चुका है लेकिन अब इस पर नियम बना कर इसे लागू किया जाएगा.

सरकार का कहना है कि नए क़ानून से इस गैर-कानूनी काम में शामिल लोगों के बीच डर फैलेगा.

भारत में गुजरात ही एकमात्र राज्य है जहाँ शराब पर पूर्ण तौर पर प्रतिबंध है.

राज्य विधान सभा ने यह सख्त विधेयक साल 2009 में तब पारित किया था जब शराब पीने से बहुत सारे लोग मारे गए थे. लेकिन राज्यपाल ने इस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था.

गुजरात के कानून मंत्री दिलीपभाई संघानी

"जो जानबूझ के दारू की मिलावट ऐसी चीज़ों के साथ करके बेचेगा जिससे किसी की जान पर ज़ोखिम हो या जान चली जाए तो दाऱू बनाने वाले और बेचने वाले के साथ अब नए कानून से मृत्यूदंड की सज़ा तक हो सकती है."

पत्रकारों का कहना है कि वह चाहतीं थी कि मौत की सज़ा का प्रावधान बिल से हटाया जाए लेकिन राज्य सरकार ने इसे मानने से इंकार कर दिया.

इसे फिर कानूनी सलाह के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया. दिल्ली से इजाज़त के बाद ही राज्यपाल ने इस को स्वीकृती दी है.

यह कानून अधिकारियों को गैर कानूनी शराब ले जानी वाली गाड़ियों को ज़ब्त करने और उन्हें नीलाम करने का अधिकार भी देगा.

गरीब होते हैं पीड़ित

आम तौर पर देसी दारू के नाम से जाने जानी वाली ये शराब 200 मिलीलीटर के पलास्टिक के पैकेटों में दस रूपए में बेची जाती है. ज़्यादातर उपभोक्ता गरीब और देहाडी़दार मज़दूर होते हैं.

इन पैकेटों को मोटरसाईकिलों और स्कूटरों पर अहमदाबाद में भेजा जाता है. कई बार राज्य की राजधानी में इसे बड़े डिब्बों में भी चुपके से ले जाया जाता है.

शहर भर में फैली झुग्गी झोंपड़ियों से फिर इन्हें बेचा जाता है.

स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस भी आम तौर पर इनसे मिली होती है और शराब बेचने वालों से हफ्ता लेतीं हैं.

गुजरात की ज़हरीली शराब में मिथाइल एलकोहल और कई खतरनाक रसायन मिले होते हैं जिनसे दौरे, उल्टी और मौत भी हो सकती है.

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