किशनजी के अंतिम संस्कार में कई नेता शामिल

 सोमवार, 28 नवंबर, 2011 को 03:20 IST तक के समाचार
माओवादी

किशन जी के अंतिम संस्कार में माओवादी समर्थक और राजनीतिक दल के लोग मौजूद थे.

माओवादियों के शीर्ष नेता कोटेश्वर राव यानी किशनजी का अंतिम संस्कार रविवार को करीमनगर स्थित उनके पैतृक स्थल पेदापल्ली में किया गया.

इसमें बड़ी संख्या में माओवादी समर्थक और राजनीतिक दल के लोग मौजूद थे.

किशनजी के छोटे भाई अंजनेयूलू ने अंतिम क्रियाकर्मों को अंजाम दिया.

पेदापल्ली में मौजूद पत्रकारों नें बताया कि इस क़स्बे में किशनजी के अंतिम संस्कार के लिए एक जन सैलाब सा उमड़ पड़ा.

ख़ास तौर पर इसलिए भी क्योंकि किशनजी नें वर्ष 1969 से ही अलग तेलंगाना राज्य के लिए छेड़े गए आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभायी थी.

यही वजह है कि भूमिगत आंदोलन से जुड़े होने के बावजूद राजनितिक दलों के नेता उन्हें आदर से देखा करते थे.

नेताओं की मौजूदगी पर सवाल

उनके अंतिम संस्कार में कांग्रेस के सांसद और तेलगूदेशम पार्टी के विधायक भी शामिल थे. इसके अलावा तेलंगाना राष्ट्र समिति के विधानसभा में नेता कोप्पुला ईश्वर, ई. राजेंदर और एमएलसी लक्ष्मण राव भी मौजूद थे.

बड़ी संख्या में राजनितिक दलों के नेताओं की मौजूदगी नें सबको हैरान कर दिया. इनकी मौजूदगी नें और भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

सबसे बड़ा सवाल है कि माओवादियों की पैठ राजनीतिक दलों में भी हो चुकी है.

जानकार मानते हैं कि ये कोई नयी बात नहीं है क्योंकि माओवादियों के आधार वाले इलाकों में चुनाव जीतने के लिए राजनितिक दलों के लोगों को माओवादियों की मदद लेनी पड़ती है.

हाँलाकि माओवादी संसदीय राजनीति पर विश्वास नहीं रखते और वह हमेशा चुनावों का बहिष्कार करते हैं, बावजूद इसके किशनजी नें पश्चिम बंगाल के विधान सभा के दौरान लोगों को वाम मोर्चे के उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ वोट डालने का आवाह्नन किया था.

तेलंगाना का समर्थन

जहाँ तक कांग्रेस, तेलगूदेशम पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति का सवाल है तो जानकार मानते हैं कि किशनजी के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने वालों पर ये दल इसलिए भी कार्रवाई नहीं कर सकते हैं क्योंकि पूरे तेलंगाना क्षेत्र में कोटेश्वर राव को तेलंगाना पृथक राज्य के आंदोलन का एक बड़ा नेता माना जाता है.

राजनितिक दल के नेताओं की दुविधा यह है कि अगर वह अंतिम संस्कार में नहीं जाते तो उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता जो उनके राजनितिक भविष्य के लिए अच्छा नहीं होता.

जहाँ तक दलों का सवाल है तो वह इस बारे में अपने नेताओं पर करवाई कर तेलंगाना क्षेत्र के लोगों के बीच ख़लनायक नहीं बनना चाहते हैं.

हाँलाकि स्थानीय पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर माओवादी समर्थक और लोक गायक ग़दर का कहना था कि राजनीतिक दल के नेता कोटेश्वर राव के "पैर छूते" थे.

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