
राज्य सरकार की केबिनेट राज्य को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है
उत्तर प्रदेश के दो दिनों के विधानसभा सत्र के पहले दिन भारी हंगामें के बीच राज्य के चार हिस्सों में बंटवारें का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया है.
इस प्रस्ताव के पारित होते ही सदन को अनिश्चित काल के स्थगित कर दिया गया है.
विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद विधान सभा में पारित इस प्रस्ताव के अनुसार उत्तर प्रदेश को चार नए राज्यों - पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश में बांटने की सिफारिश की गई है.
अब ये प्रस्ताव विधान परिषद के समक्ष पेश होगा और उसके बाद केंद्र सरकार के पास जाएगा जहां इस पर अंतिम मुहर लगेगी.
विधानसभा में हंगामा
सोमवार सुबह विधानसभा का सत्र शुरु होते ही विपक्ष ने सरकार के ख़िलाफ़ पोस्टर लहराए जिनपर लिखा हुआ था कि राज्य की मुख्यमंत्री मायावती नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दे.
विधानसभा का सत्र जैसे ही सुबह 11 बजे शुरु हुआ विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मांग की या तो मायवती इस्तीफ़ा दे या फिर केंद्र की सरकार राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करे.
हालांकि स्पीकर ने विपक्षी दलों को मनाने की कोशिश करते हुए कहा कि वे प्रश्नकाल को पूरा होने दे फिर उनके मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है.
लेकिन विपक्ष चाहती थी कि विधानसभा में राज्य की क़ानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस हो और सपा और भाजपा चाहती थी कि अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए.
इस हंगामें के बीच विधानसभा का सत्र दोपहर 12.20 तक के लिए स्थगित करना पड़ा था. जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो सत्तारूढ़ दल ने तुरंत राज्य के विभाजन करने की सिफ़ारिश वाला प्रस्ताव पेश कर इसे ध्वनि मत से पारित करवा लिया.
'अल्पमत में सरकार'
समाजवादी पार्टी का दावा है कि सरकार बहुमत खो चुकी है क्योंकि अगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने चालीस विधायकों को टिकट नहीं दिए है.
समाजवादी पार्टी का कहना है कि जिन विधायकों को टिकट नहीं दिए गए हैं वे अब सरकार का समर्थन नहीं कर रहे हैं.
लेकिन मायावती ने विपक्ष के इस आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उनकी सरकार अल्पमत में नहीं है.
समाजवादी पार्टी और भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर को ज्ञापन सौंपते हुए बसपा के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की है.
मायावती ने राज्य को चार भागों में बांटने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने ये घोषणा की थी कि उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने के लिए विधान सभा के अगले सत्र में प्रस्ताव लाएगी
समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव का कहना था, ''मायावती सरकार पर से लोगों का विश्वास ख़त्म हो गया है. सरकार अल्पमत में आ गई है क्योकि कई जिन विधायकों को टिकट नहीं दी गई है वे मायवती से गुस्सा है.अब उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं है.''
शिवपाल यादव का कहना था कि मायवती सरकार राज्य को बांटने का प्रस्ताव पास नहीं करवा पाएंगी क्योंकि वे अल्पमत में है.
सपा के अंबिका चौधरी का कहना है कि राज्य के बंटवारे के मुद्दे पर सभी दलों की स्पष्ट राय है कि वे विभाजन नहीं चाहती.

















