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केजरीवाल के पत्र पर भड़की कांग्रेस पार्टी

 शुक्रवार, 4 नवंबर, 2011 को 07:49 IST तक के समाचार
अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल को उनके विभाग ने नोटिस भेजा था

टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे गए पत्र पर कांग्रेस ने कड़ी नाराज़गी जताई है.

भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रह चुके अरविंद केजरीवाल को अपने त्यागपत्र के बाद विभाग को नौ लाख से कुछ ज़्यादा की राशि लौटानी थी. जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया था.

अरविंद केजरीवाल ने 9,27,787 रुपए का चेक और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को संबोधित एक पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा था.

इस पत्र में केजरीवाल ने लिखा है कि उनके उन मित्रों को तंग न किया जाए, जिन्होंने उन्हें ये बकाया चुकाने के लिए ब्याज़ मुक्त कर्ज़ दिया है.

पत्र

पत्र में केजरीवाल ने यह भी लिखा है कि वे पाँच वर्षों से लगातार सरकार को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया है, जिसकी उन्हें सज़ा दी जा रही है. लेकिन सरकार ये मानने को तैयार नहीं.

केजरीवाल ने लिखा है कि चेक भेजने का मतलब ये नहीं है कि वे अपना दोष स्वीकार कर रहे हैं, बल्कि वे विरोध के बीच ये चेक भेज रहे हैं.

कांग्रेस को केजरीवाल का ये पत्र काफ़ी नागवार गुज़रा है. पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा है कि ये देश के शीर्ष कार्यालय का अपमान है.

पत्रकारों से बातचीत में अल्वी ने कहा, "केजरीवाल का प्रधानमंत्री को पत्र लिखना प्रधानमंत्री कार्यालय का अपमान है. मैं नहीं जानता कि केजरीवाल किस पद पर थे, लेकिन उन्हें ये पत्र अपने वरिष्ठ अधिकारी को लिखना चाहिए था, जो इस मामले पर ध्यान देता."

राशिद अल्वी ने टीम अन्ना की एक और सदस्य और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की पूर्व अधिकारी किरण बेदी पर भी निशाना साधा और कहा कि वे भी ग़ैर सरकारी संगठनों से लिए अतिरिक्त पैसों को लौटाने के बाद प्रधानमंत्री को पत्र लिख सकती हैं.

सवाल

"टीम अन्ना के एक सदस्य कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए, तो एक अन्य सदस्य इकोनॉमी क्लास में सफ़र करती हैं और ग़ैर सरकारी संगठनों से अतिरिक्त पैसे लेती हैं. जबकि तीसरे सदस्य ये घोषणा करते हैं कि एक व्यक्ति संविधान से ऊपर होता है. मुझे पूरा भरोसा है कि अन्ना हज़ारे इसलिए मौन व्रत पर गए हैं क्योंकि अपने टीम के सदस्यों के आचरण पर सवालों का जवाब देना कठिन था"

राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता

अन्ना हज़ारे के मौन व्रत पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अन्ना हज़ारे ने अपने टीम के कुछ सदस्यों के आचरण पर परेशान करने वाले सवालों को टालने के लिए शायद मौन व्रत लिया होगा.

राशिद अल्वी ने कहा, "टीम अन्ना के एक सदस्य कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह होना चाहिए, तो एक अन्य सदस्य इकोनॉमी क्लास में सफ़र करती हैं और ग़ैर सरकारी संगठनों से अतिरिक्त पैसे लेती हैं. जबकि तीसरे सदस्य ये घोषणा करते हैं कि एक व्यक्ति संविधान से ऊपर होता है. मुझे पूरा भरोसा है कि अन्ना हज़ारे इसलिए मौन व्रत पर गए हैं क्योंकि अपने टीम के सदस्यों के आचरण पर सवालों का जवाब देना कठिन था."

राशिद अल्वी ने लोकपाल विधेयक पर प्रशांत भूषण के संसद की स्थायी समिति के सामने पेश होने पर भी सवाल उठाए और कहा कि टीम अन्ना को प्रशांत भूषण के मामले में अपना रुख़ साफ़ करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराए जाने के बारे में प्रशांत भूषण का बयान भारत के रुख़ के ख़िलाफ़ तो है ही, बल्कि ये जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख़ का समर्थन भी करता है.

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