
अन्ना हज़ारे की टीम और सरकार के बीच लोकपाल और इससे जुड़े मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.
केंद्रीय मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने सिविल सोसाइटी के सदस्यों से कहा है कि वे सरकार से सीधे-सीधे बात करें न कि मीडिया के ज़रिए.
दरअसल एक दिन पहले अन्ना हज़ारे ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि यूपीए सरकार में गैंग ऑफ़ फ़ोर यानी चार मंत्रियों की चौकड़ी जनलोकपाल बिल के ख़िलाफ़ है और यही लोग योजनाबद्ध तरीके से उनके सहयोगियों के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं.
"किरण बेदी ने अपराध किया है तो आप उन्हें फाँसी दे दीजिए, उन्हें जेल भेज दीजिए. लेकिन लोकपाल बिल लाइए. यहाँ पत्रकार वार्ता में आप तय नहीं कर सकते कि कौन सा आरोप सही है कौन सा नहीं."
अरविंद केजरीवाल
इसी संदर्भ में सलमान ख़ुर्शीद ने मीडिया से कहा है कि सरकार और नागरिक समाज के और दरार न पैदा करें.
उधर कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर सरकार को लगता है कि किरन बेदी या अन्ना के दूसरे सहयोगी दोषी हैं तो उन्हें फाँसी की सज़ा दी जाए लेकिन सरकार को हर क़ीमत पर लोकपाल बिल लाना होगा.
पिछले कुछ दिनों से टीम अन्ना के सदस्यों पर लगातार तरह-तरह के आरोप लगते आए हैं. किरण बेदी पर आरोप लगाया है कि वह कथित तौर पर उन एनजीओ और संस्थाओं से ज़्यादा बिल वसूल रही हैं, जो उन्हें सेमिनार या बैठकों में बुलाते रहे हैं.
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने कहा, "किरण बेदी ने अपराध किया है तो आप उन्हें फाँसी दे दीजिए, उन्हें जेल भेज दीजिए. लेकिन लोकपाल बिल लाइए. यहाँ पत्रकार वार्ता में आप तय नहीं कर सकते कि कौन सा आरोप सही है कौन सा नहीं."
जब केजरीवाल से पूछा गया कि दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके भाजपा के साथ संबंध तो उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की किसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देना बेमतलब है.
अरविंद केजरीवाल काफ़ी तीखे तेवरों में नज़र आए. उनका कहना था, आप देश की सभी एजेंसियों को हमारे पीछे छोड़ दीजिए. हमने ग़लती की है तो हमें कड़ी सज़ा दीजिए पर लोकपाल लाना होगा.
उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नियत साफ़ हो तो एक दिन में बिल पर सहमति बन सकती है.केजरीवाल ने कहा कि वे लोग बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन सरकार ही माहौल ख़राब कर रही है.
टीम अन्ना की बैठक 29 अक्तूबर को हो रही है.

















