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एस्सार सलवा जुड़ुम को पैसा देती रही है: माओवादी

 मंगलवार, 4 अक्तूबर, 2011 को 17:07 IST तक के समाचार
माओवादी

माओवादियों का कहना है कि वे सिद्धांत से समझौता करके पैसा नहीं लेते

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने इस बात का खंडन किया है कि उनका संगठन लौह अयस्क के खनन और उसके परिवहन में लगी एस्सार कंपनी से लेवी के तौर पर पैसे वसूलता है.

संगठन का कहना है कि ऐसे कार्पोरेट घराने जो प्राकृतिक संपदा के दोहन में लगे हुए हैं और जिनके ख़िलाफ़ उनका संगठन संघर्ष कर रहा है, ऐसे घरानों से पैसे लेने का 'सवाल ही पैदा नहीं होता'.

संगठन की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता गुडसा उसेंडी ने एक पहले से रिकॉर्ड किए गए बयान में कहा है,"हमारी पार्टी के लिए जनता के हित ही सर्वोपरि हैं. हमारी पार्टी जल, जंगल और ज़मीन पर जनता के अधिकार के लिए समर्पित है. एस्सार से पैसे लेने की बात सफ़ेद झूठ है."

पिछले माह छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में पुलिस ने माओवादियों को कथित रूप से पैसे पहुंचाने के आरोप में लोह अयस्क के परिवहन में लगी एस्सार कंपनी के एक महाप्रबंधक, एक ठेकेदार और उनके एक कथित सहयोगी को गिरफ़्तार किया है.

अमरीका से ख़तरा

गुडसा उसेंडी ने स्वीकार किया कि अपना आंदोलन चलाने के लिए उनका संगठन चंदा लेता है.

वे कहते हैं,"यह भी सच है कि हम अपने आंदोलन को जारी रखने के लिए अपनी वित्तीय नीति के मुताबिक़ विभिन्न लोगों से चंदा लेते हैं. लेकिन उन दलाल पूंजीपतियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों से नहीं जिनको उखाड़ फेंकने के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं."

विकीलीक्स की ओर से जारी दस्तावेज़ में दी गई जानकारियों के बारे में माओवादियों का कहना है कि अमरीकी दूतावास से अपने देश को भेजे गए केबल्स से कोई झूठ सच नहीं हो जाता.

"इससे यह भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि माओवादी आंदोलन को कुचलने के लिए अमरीकी साम्राज्यवादियों और भारत के शासक वर्गों में कितना गहरा तालमेल है. यह इस बात का भी संकेत है कि हमारे अंदरूनी मामलों में अमरीकी साम्राज्यवादियों की दखल कितनी बढ़ चुकी है और देश की संप्रभुता के लिए यह कितना बड़ा ख़तरा है"

उसेंडी का कहना है,"इससे यह भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि माओवादी आंदोलन को कुचलने के लिए अमरीकी साम्राज्यवादियों और भारत के शासक वर्गों में कितना गहरा तालमेल है. यह इस बात का भी संकेत है कि हमारे अंदरूनी मामलों में अमरीकी साम्राज्यवादियों की दखल कितनी बढ़ चुकी है और देश की संप्रभुता के लिए यह कितना बड़ा ख़तरा है."

गुडसा उसेंडी का कहना है कि वह 'प्राकृतिक संपदा की लूट खसोट' में शामिल एस्सार सहित सभी कंपनियों का विरोध करते आ रहे हैं. इस विरोध के दौरान माओवादियों ने एस्सार कंपनी के सैकड़ों वाहनों को भी जला डाला था.

माओवादियों का कहना है कि एस्सार कंपनी माओवादियों को नहीं बल्कि सलवा जुडूम के नेताओं को पैसे पहुंचाती रही है जो माओवादियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.

मामला

एस्सार की ओर से माओवादियों को पैसे देने की बात की जानकारी विकिलीक्स की रिपोर्ट में किया गया था.

इसके बाद पुलिस ने कंपनी के एक ठेकेदार बीके लाला और उसके सहयोगी को दंतेवाड़ा में गिरफ़्तार किया था. पुलिस का कहना है कि ये दोनों माओवादियों तक पैसे पहुंचाने जा रहे थे.

पुलिस का कहना है कि उसने ठेकेदार के पास से 15 लाख रूपए बरामद किए हैं.

पुलिस कहती है अभी स्पष्ट नहीं है कि यह रकम कंपनी की तरफ से दी गई थी या लाला खुद इसे माओवादियों को देने के लिए जा रहे थे.

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