'योजनाएँ ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वालों तक सीमित नहीं'

 सोमवार, 3 अक्तूबर, 2011 को 20:42 IST तक के समाचार
गरीबी

रिपोर्टें आई थीं कि कांग्रेस ने भी खुद को इस हलफ़ानामे से दूर कर लिया था क्योंकि इससे कांग्रेस के मुख्य वोटबैंक पर सीधा असर पड़ता था.

ग़रीबी रेखा पर सुप्रीम कोर्ट में योजना आयोग के हलफ़नामे से पैदा हुए बवाल पर सफ़ाई देते हुए आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इसे आयोग को शर्मिंदा करने की कोशिश बताया है.

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग ये कतई नहीं सोचता कि ग़रीबों को मिलने वाले सरकारी फ़ायदों को ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों तक ही सीमित रखा जाए.

उच्चतम न्यायालय में दिए गए अपने हलफ़नामें में योजना आयोग ने कहा था कि शहरी क्षेत्रों में प्रति माह लगभग 4800 रुपए ख़र्च करने वाले और ग्रामीण क्षेत्र में प्रति माह लगभग 3800 रुपए ख़र्च करने वाले परिवार को ही ग़रीब माना जाए.

इस हलफ़नामें की कड़ी आलोचना हुई थी. इसे ग़रीबों की संख्या कम करके दिखाने की कोशिश बताया गया था. रिपोर्टें आई थीं कि कांग्रेस ने भी ख़ुद को इस हलफ़नामे से दूर कर लिया था क्योंकि इससे कांग्रेस के मुख्य 'वोटबैंक' पर सीधा असर पड़ता था. राहुल गाँधी के भी इस मामले में रुचि लेने की खबरें आई थी.

गरीबी के फ़ायदे

"योजना आयोग ये कतई नहीं सोचता है कि गरीबों को मिलने वाले सरकारी फ़ायदों को गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों तक ही सीमित रखा जाए. सरकार ग़रीबी रेखा की बजाय प्राथमिकता श्रेणी की बात कर रही है जिसमें सभी ज़रूरतमंद ग़रीबों की बात की गई है और सरकारी कार्यक्रमों से किसी भी ग़रीब और वंचित को बाहर नहीं रखा जाएगा"

मोंटेक सिंह अहलूवालिया, योजना आयोग उपाध्यक्ष

ग्रामीण विकास मंत्रालय में भी हलफ़नामे पर बेचैनी थी. इसी पर सोमवार को ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बीच बैठक हुई और बाद में दोनों ने संवाददाताओं को संबोधित किया. दोनो ही नेता बचाव की मुद्रा में दिखे.

आंकड़ा बेहद कम

मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि उन्होंने अदालत में दाख़िल हलफ़नामें में प्रति-माह ख़र्चे के आंकड़े पेश किए गए थे, लेकिन मीडिया में इसे प्रतिदिन ख़र्चे के रुप में पेश किया और ये आंकड़ा बेहद कम दिखता है.

ग़ौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोंटेक सिंह अहलूवालिया को चुनौती दी थी कि वो 32 रुपए में एक दिन का ख़र्च चला कर दिखाएं. अहलूवालिया ने कहा कि योजना आयोग ये कतई नहीं सोचता है कि गरीबों को मिलने वाले सरकारी फ़ायदों को गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों तक ही सीमित रखा जाए.

उधर जयराम रमेश ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के नरेगा जैसे क़रीब 90 प्रतिशत कार्यक्रम ग़रीबी से प्रभावित सभी लोगों के लिए हैं, ना सिर्फ़ ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए.

अहलूवालिया ने कहा कि योजना आयोग ने हलफ़ानामा उच्चतम न्यायालय के सवालों के बाद दायर किया था जिसमें ग़रीबी रेखा के ताज़ा आंकड़ों को लेकर सफ़ाई मांगी गई थी और आयोग की तरफ़ से मात्र ताज़ा आंकड़े ही पेश किए गए थे.

उन्होंने इन आरोपों का खंड़न किया कि आयोग ग़रीबों की संख्या कम करके दिखाने की कोशिश कर रहा है. अहलूवालिया ने कहा कि सरकार ग़रीबी रेखा की बजाय प्राथमिकता श्रेणी की बात कर रही है जिसमें सभी ज़रूरतमंद ग़रीबों की बात की गई है और सरकारी कार्यक्रमों से किसी भी ग़रीब और वंचित को बाहर नहीं रखा जाएगा.

उन्होंने बताया कि हलफ़नामे में दिए ग़रीबी के आंकड़े और उनकी मासिक आमदनी भी लोगों की गंभीर मुश्किलों की ओर इशारे करती हैं, हालाँकि इस हलफ़ानामें को वापस लिए जाने पर किए गए सवाल को वो टाल गए.

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