पेश हुआ भूमि अधिग्रहण बिल

सिंचित भूमि

मसौदे के अनुसार बहु-फ़सली सिंचित भूमि का अधिग्रहण संभव नहीं होगा.

केंद्र सरकार बुधवार को लोक सभा में ज़मीन अधिग्रहण बिल पेश कर किया है. इस बिल का लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा है.

मॉनसून सत्र एक दिन बाद यानी आठ सितंबर को ख़त्म हो रहा है.

पुनर्वास पैकेज

  • ज़मीन के मालिकों और आश्रितों के लिए विस्तृत पुनर्वास पैकेज
  • मुआवज़ा: ग्रामीण ज़मीन के लिए बाज़ार मूल्य से चार गुना और शहरी भूमि के लिए दोगुना
  • प्रभावित परिवार को 12 महीने तक तीन हज़ार निर्वाह भत्ता, इसके बाद 20 साल तक दो हज़ार रुपए वार्षिक भृत्ति
  • प्रभावित परिवार के एक सदस्य को अनिवार्य रूप से रोज़गार या दो लाख रुपए
  • अधिग्रहण के लिए 80 प्रतिशत परिवारों की मंज़ूरी अनिवार्य

संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने इस बात के संकेत दिए थे कि भू अधिग्रहण विधेयक लोक सभा में पेश किया जाएगा.

कैबिनेट पहले ही इस बिल को मंज़ूरी दे चुकी है. ग्रामीण विकास मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद से ही जयराम रमेश काफ़ी ज़ोर शोर से इस बिल के मसौदे पर काम कर रहे थे.

क्लिक करें भूमि अधिग्रहण विधेयक के मसौदे पर रस्साकशी

हालांकि इस विधेयक को लेकर उद्योग जगत, बिल्डरों और किसानों की राय काफ़ी अलग-अलग है.

हाल के कुछ वर्षों में नंदीग्राम समेत कई जगहों पर ज़मीन अधिग्रहण को लेकर कई विवाद खड़े होते रहे हैं.

कुछ महीने पहले ही उत्तर प्रदेश के भट्टा परसौल समेत कई इलाक़ों में भी अधिग्रहण को लेकर ख़ासा बवाल हुआ है. कई जगह अदालत के आदेश के तहत अधिग्रहणों पर रोक भी लगाई गई है. उत्तर प्रदेश में तो ये एक चुनावी मुद्दा बनता हुआ नज़र आ रहा है.

वर्तमान में लागू ज़मीन अधिग्रहण क़ानून 1894 में बना था और 117 साल पुराना है. भारत सरकार ने भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के लिए विधेयक का मसौदा जुलाई को देश के सामने रख दिया था.

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