राजीव के हत्यारों की क्षमा याचिका ख़ारिज

नलिनी और मुरुगन

राजीव गाँधी के हत्यारों का भविष्य तय करने में बीस साल लगे

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के तीन हत्यारों की क्षमा याचना को ख़ारिज कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1999 में तमिल टाइगर मुरुगन, सांतन, पेरारिवलन और नलिनी को मौत की सज़ा की पुष्टि की थी.

बाद में नलिनी के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था.

एक महिला आत्मघाती हमलावर ने 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने गए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.

उनके साथ इस हमले में बीस से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

लंबा इंतज़ार

राजीव गांधी की हत्या के पूरे बीस साल बाद उनके हत्यारों की सज़ा के बारे में फ़ैसला हो पाया है.

राजीव गाँधी

एलटीटीई की एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गाँधी की हत्या की थी

राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने कहा है कि तीनों लोगों की क्षमा याचना को पिछले हफ़्ते ही ख़ारिज कर दिया गया था.

मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे तीन लोगों पर आत्मघाती हमले की साज़िश रचने और उसे अंजाम तक पहुँचाने का आरोप था.

गृह मंत्रालय ने मुजरिमों की क्षमा याचना पर वर्ष 2005 में ही अपनी राय ज़ाहिर कर दी थी.

लेकिन फिर से उससे फ़रवरी 2011 में राय देने को कहा गया, जिस पर इस साल मार्च में गृह मंत्रालय ने अपनी राय दे दी.

इससे पहले राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने मई में पंजाब के देवेंदर सिंह भुल्लर और असम के महेंद्र नाथ दास की क्षमा याचनाओं को ख़ारिज कर दिया था.

दोनों अब मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं.

भुल्लर को पंजाब के एक पुलिस अधिकारी और 1993 में तत्कालीन युवा काँग्रेस अध्यक्ष एम एस बिट्टा पर हमले की साज़िश रचने का दोषी पाया गया था.

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