'लड़ाई के अंतिम दिनों की जांच होनी चाहिए'

श्रीलंका पर फ़िल्म (फ़ाईल फ़ोटो)

चैनल का दावा है कि फ़िल्म में दिखाए गए सारे विडियो असली हैं.

भारत ने कहा है कि दो साल पहले 2009 में श्रीलंका की सेना और तमिल छापामारों के बीच हुई लड़ाई के अंतिम दिनों के घटनाक्रम साफ़ नहीं है और श्रीलंका की सरकार को इस मामले की विस्तृत छानबीन करनी चाहिए.

शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि इस मामले में जो चिंता जताई जा रही है उसकी जांच पड़ताल होनी चाहिए.

उसी तरह श्रीलंका पर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बारे में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत को इस बारे में श्रीलंका सरकार के विचार की जानकारी है.

भारत के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के बारे में अभी भी कई सवाल बाक़ी हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने ये प्रतिक्रिया एक ब्रितानी टीवी स्टेशन चैनेल-4 के एक वृतचित्र - 'श्रीलंकाज़ किलिंग फ़ील्ड्स' या श्रीलंका की ख़ूनी भूमि, पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी.

'किलिंग फ़ील्ड्स'

चैनेल का दावा है कि उसने इस फ़िल्म में श्रीलंका की फ़ौज के ज़रिए लड़ाई के अंतिम दिनों में तमिलों की हत्या की घटनाओं को दर्शाया है.

चैनेल-4 ने कहा है कि वृतचित्र में पहले कभी इस्तेमाल नहीं किए गए फ़ूटेज दिखाए गए हैं.

भारत ने जिस तरह से अपनी प्रतिक्रिया दी है वो एक महत्वपूर्ण घटना है.संसद के आने वाले मॉनसून सत्र में जब दूसरी राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे को उठाएंगी तब ये देखने वाली बात होगी की सरकार का रवैया क्या होता है.

प्रोफ़ेसर सहदेवन, दक्षिण एशिया मामलों के जानकार

श्रीलंका की सरकार ने वृतचित्र को नक़ली बताया था और कहा था कि तमिलों को मारते हुए दिखाए गए लोग दरअसल ख़ुद तमिल विद्रोही थे.

चैनेल का कहना है कि फ़िल्म में दिखाए गए सभी फ़ूटेज असली हैं.

ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने अब तक उस वृतचित्र पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.

ये फ़िल्म हाल ही में एक भारतीय चैनेल पर भी दिखाई गई थी.

जानकारों का मानना है कि भारत सरकार इस मामले पर साफ़ कुछ कहने से बचना चाह रही थी लेकिन एक भारतीय चैनल पर इस वृतचित्र को दिखाए जाने के बाद भारत सरकार पर कोई ना कोई प्रतिक्रिया देने के लिए दबाव बन रहा था.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविधालय में दक्षिण एशिया मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर सहदेवन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि भारत ने जिस तरह से अपनी प्रतिक्रिया दी है वो एक महत्वपूर्ण घटना है.

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर भारतीय प्रतिक्रिया के बारे में प्रोफ़ेसर सहदेवन का कहना है, ''हालाकि इस बारे में भारत सरकार की स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है लेकिन भारत सरकार का प्रतिक्रिया देना ही बड़ी बात है.''

प्रोफ़ेसर सहदेवन ने कहा कि संसद के आने वाले मॉनसून सत्र में जब दूसरी राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे को उठाएंगी तब ये देखने वाली बात होगी की सरकार का रवैया क्या होता है.

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