एक और अधिग्रहण पर रोक

भूअधिग्रहण के ख़िलाफ़ आंदोलन

उत्तर प्रदेश में किसान भूअधिग्रहण के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं.

ग्रेटर नॉएडा के शाहबेरी गाँव में राज्य सरकार के भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुलंदशहर ज़िले में औद्योगिक विकास के नाम पर किये गए एक और अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश दिया है.

ये अंतरिम आदेश जस्टिस अमर सरन और जस्टिस रणविजय सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिया.

मामले की पैरवी कर रहे वकीलों के अनुसार बुलंदशहर जिले के जहाँ चोला औद्योगिक एरिया के विकास के नाम पर किसानो की ज़मीन के अधिग्रहण की कार्रवाई साल 1998-99 में भारतीय जनता पार्टी सरकार के ज़माने में शुरू हुई थी.

इस अधिग्रहण के नौ-दस साल बीत जाने के बाद भी जब सरकारों ने यहाँ कोई विकास नहीं किया तो कोर्ट ने यहाँ के किसानो की याचिका पर न सिर्फ यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दे दिया बल्कि अधिग्रहण के लिए प्रयोग की गई अरजेनसी की धारा पर भी सवाल उठाए है.

राज्य सरकार ने यहाँ उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास कॉरपोरेशन,कानपुर के लिए साल 1998 में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी और इस सिलसिले लगभग 10 गांव की 250 एकड़ ज़मीन वर्ष 2002 तक किसानो से अधिग्रहित कर ली गई.

लेकिन उसके बाद से विकास के नाम पर वहां कुछ नहीं हुआ और किसानों को मुआवज़ा भी नही दिया गया.

इसी मुद्दे को लेकर किसानो ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की जिसपर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अधिग्रहीत की गई भूमि पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश जारी कर दिया.

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