गंगा को बचाने के लिए उमा की यात्रा

उमा भारती

इसी मुद्दे पर उमा भारती ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी से भी मुलाकात की थी

भारतीय जनता पार्टी नेता उमा भारती ने गढ़मुक्तेश्वर से गंगा बचाओ अभियान की शुरुआत की है.

उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल में जिन जगहों से गंगा गुज़रती है, उमा भारती उसी से लगे रास्ते से गुज़रेंगी और सभाओं को संबोधित करेंगी.

उमा के मुताबिक़ उनकी कोशिश है- लोगों में गंगा से जुड़े मुद्दों के बारे में जागरुकता फ़ैलाना. हालाँकि उमा भारती पर गंगा के राजनीतिकरण करने के भी आरोप लग रहे हैं.

हाल ही में उन्होंने इसी मुद्दे पर उमा भारती ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी से भी मुलाकात की थी.

क्लिक करें सिर्फ़ पैसे से गंगा साफ़ नहीं होगी

लेकिन अभी ये यात्रा क्यों?, इस बारे में उमा भारती ने बीबीसी को बताया, "बद्रीनाथ और केदरनाथ के बीच में धारीदेवी नाम की जगह में बिजली की परियोजना पर काम चल रहा है जिसे केंद्र और राज्य सरकार दोनो की मंज़ूरी मिल चुकी है. पर्यावरण की मंज़ूरी के बिना इसकी उँचाई बढ़ा दी गई है जिसके कारण इलाक़े डूब क्षेत्र में आ गए हैं. तब मैने जयराम रमेश में शिकायत की. मुझे और भी ऐसे मामलों का पता चला."

'ग़ैर-राजनीतिक'

उमा भारती के मुताबिक वो पिछले एक साल से गंगा में हो रहे प्रदूषण का मामला उठा रही हैं, हालाँकि उनके आलोचक उनके अभियान को हाल ही में हुई निगमानंद की अनशन से हुई मौत से जोड़कर देख रहे हैं.

गंगा में अवैध खनन के विरोध में पिछले 68 दिनों से हरिद्वार में अनशन कर रहे हिंदू धार्मिक गुरू स्वामी निगमानंद की मौत हो गई है.

उमा भारती कहती हैं उनका ये आंदोलन राजनीति से परे है और उन्होंने कई राज्यों की मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को आंदोलन में शामिल होने का न्योता दिया है.

मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि ये हिंदू समाज का दुर्भाग्य है कि वो अपने मान्य समाजों की रक्षा करना नहीं जानता. उन्होंने कहा कि उन्हें हिंदुओं के अलावा गंगा के पास रहने वाले मुसलमानों का भी समर्थन मिल रहा है.

उन्होंने गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की अपना मांग को दोहराया और कहा कि उनके अभियान के अगले चरण में गंगा के चारों ओर मानव शृंखला बनाई जाएगी.

उत्तर प्रदेश

ये हिंदू समाज का दुर्भाग्य है कि वो अपने मान्य समाजों की रक्षा करना नहीं जानता

उमा भारती

लखनऊ से बीबीसी उत्तर प्रदेश संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि गंगा और यमुना दोनों की प्रमुख समस्या यह है कि गंगोत्री, यमुनोत्री और हिमालय के असंख्य पहाड़ी झरनों से निकलने वाला पानी यहाँ तक नही के बराबर पहुंचता है.

भागीरथी पर टिहरी में बाँध बन जाने के बाद ऊपर की धारा लगभग 70 किलोमीटर तक ठहर कर झील बन गई है.

फिर उसके ऊपर भी बाँध बने हैं या प्रस्तावित हैं. इसी तरह अलकनंदा को भी कई जगह बांधा जा रहा है. इस ठहरे हुए पानी में वह गुण नही रहते, जो बहते हुए प्राकृतिक जल में रहते हैं.

फिर भी ऊपर के बांधों से गंगा में हरिद्वार तक मतलब भर पानी आ जाता है. यहाँ से खेतों की सिंचाई और दिल्ली की पेयजल सप्लाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी निकाल लिया जाता है. जो कुछ बचता है वह नरोरा से पहले फिर दूसरी नहर में चला जाता है.

नरोरा के बाद गंगा में भागीरथी और अलकनंदा का पानी न के बराबर रहता है. प्रयाग में स्नान के लिए बहुत हल्ला मचता है और हाईकोर्ट आदेश करता है तब राम गंगा जलाशय का पानी नरोरा के बाद गंगा में भेजा जाता है.

इसके बाद राम गंगा, काली उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम कारखानों का प्रदूषित पानी लेकर कन्नौज से पहले गंगा में मिलती है.

परिणामस्वरूप कन्नौज पहुँचते-पहुँचते गंगा अपना वास्तविक प्राकृतिक स्वरुप खोकर गंदा नाला बन जाती हैं. औद्योगिक शहर कानपुर में समस्या और विकराल हो जाती है.

लेकिन इसके बाद यमुना नदी मध्य प्रदेश की चम्बल और बुंदेलखंड की नदियों का पानी लेकर प्रयाग में मिलती हैं , तब संगम में कुछ पानी नजर आता है.

बनारस में गंगा को फिर शहर की गंदगी मिलती है और बालू खनन पर रोक से नदी के बहाव में ठहराव आ जाता है इसलिए राजघाट के आसपास गंगा नदी बेहद अशक्त और बीमार नजर आती है.

गनीमत है कि नेपाल से आने वाली नदियाँ सरयू घाघरा , राप्ती और बूढ़ी राप्ती बलिया में गंगा में काफी पानी ले आती है , जिससे वह फिर नदी जैसी दिखने लगती है.

BBC navigation

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.