ज़मीन अधिग्रहण पर लगी रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले एक महीने में तीन स्थानों पर ज़मीन अधिग्रहण पर रोक लगाई है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के पास एक गांव में 170 हेक्टेयर के भूमि अधिग्रहण पर रोक लगा दी है.

न्यायाधीश सुनील अंबावानी और न्यायाधीश काशी नाथ की खंडपीठ ने गुलिस्तां गांव के किसानों और ज़मीन के मालिकों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिग्रहण पर रोक लगाई है.

किसानों और ज़मीन मालिकों के अधिग्रहण संबंधी सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी थी.

सरकार ने जमीन अधिग्रहण की पहली सूचना पाँच सितंबर 2007 को जारी की जिसके एक साल के बाद ही 27 फरवरी 2008 को सरकार ने अधिग्रहण का नोटिस भी दे दिया था.

कोर्ट का कहना था कि सरकार ने अधिग्रहण के फै़सले के बाद प्रभावित लोगों की बातें नहीं सुनी हैं और इसी आधार पर अधिग्रहण पर रोक लगाई गई है.

कोर्ट के इस फ़ैसले को मायावती सरकार के लिए एक झटके के रुप में देखा जा रहा है.

सरकार का कहना था कि अधिग्रहण जल्दी करना ज़रुरी था लेकिन कोर्ट ने इस दलील को ख़ारिज़ कर दिया और कहा कि ज़मीन के मालिकों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए था.

यह तीसरा मौका है जब हाई कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा में ज़मीन अधिग्रहण के सरकारी फै़सले पर रोक लगाई है.

उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाक़ों में ज़मीन अधिग्रहण को लेकर किसानों और राज्य सरकार में तनातनी है.

पिछले दिनों ज़मीन अधिग्रहण को लेकर हो रहे विरोध के दौरान पुलिस को गोलियां भी चलानी पड़ी जिसमें कुछ मौतें भी हुई हैं.

इससे पहले 12 और 15 मई को हाई कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर ज़िले में ही अलग अलग स्थानों पर कई हेक्टेयर ज़मीन के अधिग्रहण पर रोक लगाई थी.

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