कहाँ से कहाँ तक पहुँच गईं कनिमोड़ी

कनिमोड़ी

कनिमोड़ी 2007 में राज्यसभा के लिए चुनी गई थी

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोड़ी इस समय विवादों में हैं.

2-जी स्पैक्ट्रम मामले में हुए घोटालों ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) की जैसे मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पहले केंद्र में दूरसंचार मंत्री ए राजा की गिरफ़्तारी तो अब पार्टी सांसद कनिमोड़ी की परेशानी.

दरअसल जब से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में 2-जी स्पैक्ट्रम मामले की जाँच शुरू हुई है, कई बड़ी कंपनियों के अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे जाना पड़ा है.

द्रमुक के लिए परेशानी इसलिए भी है कि केंद्र की गठबंधन सरकार में वो शामिल है. सीबीआई ने ताज़ा चार्जशीट में कनिमोड़ी का नाम शामिल किया है.

कनिमोड़ी पर पैसे के ग़ैर क़ानूनी लेन-देन का आरोप है और चार्जशीट में उन पर ये भी आरोप लगाया गया है कि ए राजा के साथ मिलकर उन्होंने कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाने के ऐवज़ में वित्तीय लाभ उठाया.

कवयित्री और पत्रकार

करुणानिधि

करुणानिधि ने कनिमोड़ी को पूरा समर्थन देने का फ़ैसला किया है

चेन्नई में वर्ष 1968 में जन्मीं कनिमोड़ी कवयित्री भी हैं और पत्रकारिता में भी उनका अच्छा ख़ासा अनुभव रहा है. उन्होंने अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में सब एडिटर के रूप में भी काम किया है.

सन ग्रुप से जुड़ी एक साप्ताहिक पत्रिका कुन्गुमम की संपादकीय प्रभारी रह चुकीं कनिमोड़ी सिंगापुर स्थित एक तमिल अख़बार तमिल मुरासू में फ़ीचर एडिटर भी रह चुकी हैं.

कवयित्री के रूप में उनकी कई किताबें आ चुकी हैं, जिनका अंग्रेज़ी समेत कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. वर्ष 1989 में कनिमोड़ी ने शिवकाशी के एक व्यवसायी अथिबन बोस से शादी की.

लेकिन उनका तलाक़ हो गया और फिर 1997 में उन्होंने सिंगापुर में रह रहे एक तमिल लेखक जी अरविंदन से शादी की. उनका एक बेटा भी है.

करुणानिधि के दो बेटों अलागिरी और स्टालिन के बीच करुणानिधि की राजनीतिक विरासत की लड़ाई की इतनी चर्चा हुई कि कनिमोड़ी का नाम कहीं पृष्ठभूमि में चला गया.

राजनीतिक करियर

पहले से ही कई सामाजिक कार्यों से जुड़ी कनिमोड़ी का राजनीतिक करियर उस समय चर्चा में आया, जब वर्ष 2007 में वे राज्यसभा के लिए चुनीं गईं. तब से वे राज्यसभा सांसद हैं.

पिछले साल कई पत्र-पत्रिकाओं में लॉबिस्ट नीरा राडिया और कनिमोड़ी के बीच कथित बातचीत के टेप जारी हुए थे और दावा किया गया था कि केंद्र में ए राजा को एक बार फिर दूरसंचार मंत्री बनाने के लिए लॉबिंग की जा रही थी.

ए राजा वर्ष 2008 में 2-जी स्पैक्ट्रम आवंटन के समय भी दूरसंचार मंत्री थे. प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह की दूसरी पारी में भी वे दूरसंचार मंत्री बने.

इन कथित टेप के बाद आए राजनीतिक भूचाल में कनिमोड़ी का नाम ख़ूब उछला. ए राजा पर चार्जशीट और फिर गिरफ़्तारी के बाद ये लगने लगा था कि कनिमोड़ी का नाम भी ज़रूर आएगा.

चार्जशीट

हुआ भी वही, सीबीआई ने दो अप्रैल 2010 को कनिमोड़ी के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल कर दी. सीबीआई ने कनिमोड़ी पर चार्जशीट में जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उनमें 2-जी स्पैक्ट्रम आवंटन में जिन कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाया गया, उनसे वित्तीय लाभ लेने का भी आरोप है.

ए राजा

ए राजा फ़िलहाल जेल में हैं

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में ये भी कहा है कि कनिमोड़ी ने वर्ष 2009 में ए राजा को दूरसंचार मंत्री बनाने के लिए द्रमुक मुख्यालय के साथ लॉबिंग की थी और इससे पता चलता है कि कनिमोड़ी और ए राजा के बीच आधिकारिक और राजनीतिक मामलों में कितने गहरे संबंध थे.

लेकिन वित्तीय लेन-देन की गड़बड़ियों के जो आरोप कनिमोड़ी पर लगे हैं, उसमें कई बड़ी कंपनियों पर भी सवाल उठाए हैं.

सीबीआई का दावा है कि शाहिद बलवा की कंपनी डीबी रियालिटी ने कलैग्नार टीवी को लगभग 200 करोड़ रुपए दिए थे. माना जाता है कि इसी कलैग्नार टीवी में कनिमोड़ी का 20 प्रतिशत शेयर है.

आरोप

सीबीआई का आरोप है कि कुसेगाँव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड और सिनेयुग फ़िल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से दिए गए पैसे वाजिब लेन-देन नहीं बल्कि ग्रुप कंपनी स्वान प्राइवेट लिमिटेड को यूनाइटेड सर्विस एक्सेस लाइसेंस, क़ीमती लाइसेंस और कई तरह के फ़ायदे पहुंचाने के कारण ग़ैर क़ानूनी रूप से दिए गए थे.

सीबीआई ने यह भी कहा है कि मामला दर्ज करने के बाद ही इस पैसों को वापस दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई.

कनिमोड़ी की पार्टी ने एक बैठक के बाद यह कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को क़ानूनी रूप से लड़ेगी.

पार्टी का कहना है कि सारे आरोप आकलन पर आधारित हैं और इन सभी मामलों से उनकी पार्टी बेदाग़ निकलेगी. हालाँकि पार्टी पर ये भी आरोप भी लग रहे हैं कि द्रमुक की पारिवारिक राजनीति में कनिमोड़ी को किनारे किया जा रहा है.

लेकिन दूसरी ओर ये तर्क भी सामने आ रहा है कि कनिमोड़ी के मामले पर पार्टी मुश्किलों का सामना कर रही है और हड़बड़ी में केंद्र से समर्थन वापस लेने की कोशिश नहीं करेगी.

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