भारत नहीं करेगा ऐबटाबाद जैसी कार्रवाई

ऐबटाबाद का वह परिसर जहाँ ओसामा रह रहे थे

ऐबटाबाद के इसी परिसर पर अमरीका ने सैन्य कार्रवाई करके ओसामा बिन लादेन को मारा था

भारत का कहना है कि वह पाकिस्तान का पड़ोसी देश है और ऐबटाबाद जैसी कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं. भारत के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि पाकिस्तान के साथ हमेशा युद्ध की बात करना आसान है लेकिन ये आख़िरी रास्ता नहीं है.

उन्होंने कहा कि वे लोगों की हताशा समझ सकते हैं कि भारत अभी तक पाकिस्तान में रह रहे चरमपंथियों को नहीं पकड़ नहीं पाया है. उन्होंने ये भी कहा कि चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा के साथ हमारा रुख 'कंट्रोल, ऑल्ट और डिलीट' होना चाहिए.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत को ये पता है कि अमरीका भारत को मदद नहीं कर सकता, भारत को पाकिस्तान के साथ अपने मसले ख़ुद सुलझाने होंगे.

भारत ने ये भी कहा है कि ओसामा बिन लादेन को मारने के बाद अमरीका और राष्ट्रपति बराक ओबामा की छवि बेहतर हुई है और अमरीका ने ऐसा करके एक उदाहरण पेश किया है.

जब ये पूछा गया कि क्या अमरीकी कार्रवाई से पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है, तो उनका कहना था कि वे इसे संप्रभुता के उल्लंघन का सामान्य मामला नहीं मानते क्योंकि आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध चल रहा है.

भारत ने कहा है कि अगर अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में इतने वर्षों तक रह सकता है तो इस पर भरोसा करना तर्कसंगत है कि अन्य भगोड़े भी पाकिस्तान में रह रहे हैं.

भारत के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि चरमपंथी संगठनों अल क़ायदा, तालिबान और लश्कर-ए-तैबा के बीच कोई ख़ास अंतर नहीं.

कार्रवाई करने की मांग

पाकिस्तान में अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद भारत ने कहा है कि पाकिस्तान उसकी ज़मीन से अपना अभियान चला रहे आतंकवादी संगठनों के मामले पर कार्रवाई करे.

भारत ने ये भी कहा है कि पाकिस्तान से बातचीत जारी रहेगी. क्योंकि बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है. भारत का कहना है कि परिपक्व देश के रूप में दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ काम करना चाहिए.

भारत के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक़ भारत ये भी नहीं चाहता कि गठबंधन सेना हड़बड़ी में अफ़ग़ानिस्तान से हट जाए.

ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में मारे जाने के बाद भारत सरकार ने चिंता जताई थी. उस समय गृह मंत्री ने कहा था कि इससे भारत की उन चिंताओं को बल मिलता है कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है.

भारत ने इस मामले में मुंबई हमलों के अभियुक्तों का भी हवाला दिया था, जो उसके मुताबिक़ पाकिस्तान में हैं. नवंबर 2008 में हुए मुंबई हमलों में कुल 166 लोग मारे गए थे जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल थे.

भारत पहले भी पाकिस्तान पर इस मामले में ठोस कार्रवाई न करने के आरोप लगाता रहा है जिनसे पाकिस्तान लगातार इनकार करता रहा है.

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