
सात महीनों से एक घर में बंद अनुराधा ने नोएडा के अस्पताल में दम तोड़ दिया.
राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में पिछले सात महीनों से भूखी प्यासी एक घर में बंद दो बहनों में से एक की मौत हो गई और दूसरी बहन की हालत बहुत ख़राब है.
बड़ी बहन 42 वर्षीय अनुराधा बहल की मौत बुधवार की सुबह नोएडा के कैलाश अस्पताल में हुई.
नोएडा के कैलाश अस्पताल में दोनों बहनों का इलाज करने वाले चिकित्सक संजय महाजन ने बताया कि कुपोषण के चलते अनुराधा के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और बाद में हृदयाघात से उनकी मौत हो गई.
अस्पताल के जनसम्पर्क अधिकारी वीबी जोशी के मुताबिक़ अनुराधा की छोटी बहन 38 साल की सोनाली बहल की हालत भी काफ़ी ख़राब है और उन्हें आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा जा रहा है.
जाँच
ज़िला प्रशासन ने इस मामले की जांच मजिस्ट्रेट से कराने के आदेश दे दिए हैं. नोएडा के सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान इसकी जांच करेंगे.
मजिस्ट्रेट जांच के गठन के बारे में जानकारी देते हुए सिटी मजिस्ट्रेट संजय चौहान ने कहा,''हम जानने की कोशिश करेंगे कि किन हालात में दोनों बहनों ने अपने ही घर में ख़ुद को बंद कर लिया था.''
हम जानने की कोशिश करेंगे कि किन हालात में दोनों बहनों ने अपने ही घर में ख़ुद को बंद कर लिया था.
संजय चौहान, नोएडा सिटी मजिस्ट्रेट
दोनों बहनों को सिर्फ़ एक दिन पहले मंगलवार को नोएडा पुलिस ने सेक्टर-29 के एक मकान से निकाला था. वे पिछले सात महीनों से इसी कमरे में बंद थीं.
पुलिस के अनुसार दोनों बहनों अपने पिता कर्नल (सेवानिवृत्त) ओपी बहल की मौत के बाद से भारी दबाव में थीं.
पुलिस अधीक्षक अनंत देव ने कहा कि पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस वहां पहुंची और दोनों बहनों के दरवाज़ा खोलने से इंकार करने पर पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर दोनों को बाहर निकाला.
दोनों बहनें अविवाहित हैं.
अवसाद

छोटी बहन सोनाली अस्पताल में ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रही है.
जब उनके घर से बहुत बदबू आने लगी तो रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अधिकारियों ने पहले उनके घर का दरवाज़ा खुलवाने की कोशिश की. इसमें असफल रहने के बाद उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता उषा ठाकुर से सम्पर्क किया.
उषा ठाकुर ने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद पुलिस वहां पहुंची.
ऊषा ठाकुर ने कहा,"जैसे ही दरवाज़ा खोला गया, दुर्गंध से सभी लोगों को उबकाई आने लगी. बड़ी बहन अर्धनग्न अवस्था में बिस्तर पर पड़ी थी. वह बोल नहीं पा रही थीं और न ही समझ पा रही थीं कि क्या हो रहा है. इसलिए मैंने कैशाल अस्पताल से सम्पर्क किया."
जैसे ही दरवाज़ा खोला गया, दुर्गंध से सभी लोगों को उबकाई आने लगी. बड़ी बहन अर्धनग्न अवस्था में बिस्तर पर पड़ी थी. वह बोल नहीं पा रही थीं और न ही समझ पा रही थीं कि क्या हो रहा है. इसलिए मैंने कैशाल अस्पताल से सम्पर्क किया.
ऊषा ठाकुर, सामाजिक कार्यकर्ता जिन्होंने पुलिस को सूचना दी थी
पुलिस के मुताबिक़ दरवाज़ा खुलते ही दोनों बहनों ने पानी मांगा. उन्होंने कहा कि भोजन कैंटीन से आता था.
पड़ोसियों ने कहा कि भोजन दरवाज़े के बाहर रख दिया जाता था.
नोएडा के सेक्टर-20 पुलिस थाना के निरीक्षक विजय प्रकाश ने कहा कि दोनों बहनों के छोटे भाई विपिन बहल अपनी पत्नी और बच्चों के साथ नोएडा के सेक्टर 50 में रहते हैं. वह और उनके मामा दोनों बहनों का ध्यान रखते थे, लेकिन गहरे अवसाद में होने के कारण दोनों बहन उनके साथ सहयोग नहीं कर रही थीं.
पुलिस के अनुसार जब दोनों बहनों ने उनके साथ सहयोग करना बंद कर दिया, तो उन लोगों ने भी सम्पर्क कम कर दिया.
दोनों बहनों ने अपने साथ एक कुत्ता भी रखा था, जिसकी मृत्यु क़रीब ढाई महीने पहले हो गई थी.
उनके भाई विपिन बहल ने बुधवार को बताया, ''मेरी बहनें गहरे अवसाद में थीं, मेरी पूरी मदद के बावजूद वे घर से बाहर नहीं निकलीं.''
पढ़ी-लिखी बहनें
मनोचिकित्सक संदीप वोहरा ने मीडिया से कहा, ''यह अत्यधिक भावनात्मक अलगाव का मामला हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह अत्यधिक अवसाद या अवसाद बढ़ाने वाले कुछ मनोरोग संबंधी तत्वों के कारण हो सकता है. निश्चित रूप से दोनों बेटियां पिता के बहुत क़रीब रही होंगी और वह उनके सभी फ़ैसले लेते होंगे."
पुलिस के अनुसार दोनों बहनों का शैक्षणिक रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है.
अनुराधा ने चार्टर्ड एकाउंटेंसी की शिक्षा पूरी करने के बाद पीएचडी भी की थी, लेकिन माता-पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने प्रैक्टिस करना छोड़ दिया था.
सोनाली ने इतिहास विषय से पीएचडी की है.
उधर, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बयान के अनुसार राष्ट्रीय महिला आयोग की अंतरिम अध्यक्ष यासमीन अबरार ने 'नोएडा में बहल बहनों द्वारा ख़ुद को अपने ही घर में बंद कर लेने और उनकी स्थिति की जांच के आदेश दिए हैं.'














