राष्ट्रपति का महँगाई पर काबू पाने, लोकतांत्रिक मूल्यों पर ज़ोर

प्रतिभा पाटिल

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि सरकार विदेशी बैंको में छिपा कर रखे गए भारत के धन पर चिंतित है

सोमवार को भारतीय संसद का बजट सत्र लोकसभा और राज्यसभा को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से संबोधन के साथ शुरु हो गया है.

दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा है कि केंद्र सरकार वामपंथी हिंसा, विदेशी बैंकों में छिपाकर रखे गए भारतीय धन और महँगाई के मुद्दों पर चिंतित है और कारगर क़दम उठा रही है.

राष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार हुआ है और वार्ताकार सफलतापूर्वक वहाँ अपना काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "महँगाई को रोकना और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर काबू पाना सरकार की प्राथमिकता है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ज़रिए गेहूँ और चावल की कीमतों में पिछले आठ साल में कोई वृद्धि नहीं की गई है. साथ ही लोगों को बढ़ती कीमतों से राहत पहुँचाने के लिए दालों और सब्ज़ियों को कम दरों पर लोगों तक पहुँचाया जा रहा है."

2011-12 में प्रमुख प्राथमिकताएँ:

  • महँगाई पर काबू पाना, आम आदमी को राहत दिलाना
  • सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और पारदर्शिता
  • ग़रीबों को हिस्सेदारी दिलाते हुए आर्थिक विकास जारी रखना
  • आंतरिक सुरक्षा और विदेशी मामलों पर सतर्कता
  • ऐसी विदेश नीति जिससे विश्व स्तर पर भारत की आवाज़ सुने

उनका कहना था कि देश की आंतरिक स्थिति को देखा जाए तो पुणे और वाराणसी की घटनाओं के अलावा देश में शांतिपूर्ण माहौल बना रहा है. राष्ट्रपति का कहना था कि वामपंथी उग्रवाद का सामना करने के लिए नौ राज्यों मे चुने गए 60 ज़िलों की एकीकृत कल्याण योजना के तहत काम जारी है.

ग़ौरतलब है कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच 2जी मामले पर संयुक्त संसदीय समिति की जाँच पर रविवार को सहमति बनने के संकेतों के बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के संबोधन के दौरान सदन में शांति रही.

लोकतांत्रिक शुरुआत का स्वागत

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा, "हम पाकिस्तान के साथ सार्थक बातचीत के साथ सभी मुद्दों को सुलझाना चाहते है, बशर्ते पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ उग्रवादी गतिविधियों के लिए अपनी भूमि का इस्तेमाल न होने दे."

महँगाई को रोकना और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर काबू पाना सरकार की प्राथमिकता है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ज़रिए गेहूँ और चावल की कीमतों में पिछले आठ साल में कोई वृद्धि नहीं की गई है. साथ ही लोगों को बढ़ती कीमतों से राहत पहुँचाने के लिए दालों और सब्ज़ियों को कम दरों पर लोगों तक पहुँचाया जा रहा है

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल

उन्होंने कहा कि उनके चीन, लाओस, कंबोडिया के दौरे महत्वपूर्ण रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में बसे लाखों भारतीयों के साथ सरकार करीबी संबंध जारी रखना चाहती है.

राष्ट्रपति का कहना था, "मिस्र में महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी हैं. एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते हम किसी भी देश में लोकतांत्रित शुरुआत का स्वागत करते हैं."

कृषि क्षेत्र पर ध्यान

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में ख़ासा समय कृषि क्षेत्र पर केंद्रित किया. उन्होंने कहा कि धान और गेहूँ के न्यूनतम समर्थन मूल्यों में वृद्धि की गई है ताकि किसानों को राहत मिल सके.

सरकार की उपलब्धियाँ गिनाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले छह साल में धान का समर्थन मूल्य 550 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है जबकि गेहूँ का समर्थन मूल्य 630 रुपए प्रति क्विंटल से बढाकर 1100 प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

उनका कहना था कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के ज़रिए इस क्षेत्र में लगभग 35 हज़ार करोड़ रुपए का निवेश किया गया है.

प्रतिभा पाटिल ने दोनों सदनों को सूचित किया कि केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में ऋण सुविधाओं में वृद्धि होगी और एक करोड़ हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार शासन में पारदर्शिता और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के प्रति प्रतिबद्ध है. उन्होंने चुनाव सुधारों की भी बात की और उम्मीद जताई कि इस संदर्भ में सभी राजनीतिक दल सरकार का समर्थन केरेंगे.

विकास के लिए मूलभूत ढांचा बनाए जाने पर बल देते हुए राष्ट्रपति का कहना था कि उनकी सरकार ने 11वीं पंच वर्षीय योजना में 20 लाख करोड़ रुपए निवेश के लिए रखें हैं जो 10वी पंच वर्षीय योजना के मुकाबले में दोगुना राशि है.

उनका कहना था कि इसके लिए निजी क्षेत्र से पूँजी निवेश की ज़रूरत है और पिछले साल तक मूलभूत ढांचे के क्षेत्र में निजी क्षेत्र का पूँजी निवेश लगभग 34 प्रतिशत तक पहुँच गया था.

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