
स्पेक्ट्रम मामले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. हिंदू और इसी समूह के अख़बार बिज़नेस लाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में एक नया विवाद सामने आया है.
हिंदू बिज़नेस लाइन ने प्रकाशित किया है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान( इसरो) की व्यवसायिक इकाई और देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटिड नामक कंपनी के बीच 2005 में हुए एक समझौते की छानबीन कर रहा है.
इस समझौते के तहत इसरो ने देवास मल्टीमीडिया के लिए दो उपग्रह लॉन्च किए थे. लेकिन हिंदू बिज़नेस लाइन का दावा है कि इस समझौते के तहत कंपनी को ये अधिकार भी दे दिया गया कि वो एस-बैंड स्पेक्ट्रम के 70 मेगाहर्ट्ज़ का बेतहाशा इस्तेमाल करे.
बिज़नेस लाइन के मुताबिक कैग की शुरुआती रिपोर्ट बताती है कि इस वजह से सरकारी ख़ज़ाने को दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है. इसरो अंतरिक्ष विभाग के तहत आता है जिसका प्रभार सीधे प्रधानमंत्री के पास है.
जांच की मांग
कैग की आपत्ति
- बिन नीलामी के एस बैंड के स्पेक्ट्रम का आवंटन
- प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट और अंतरिक्ष आयोग को देवास मल्टीमीडिया के साथ करार के बारे में नहीं बताया गया
देवास मल्टीमीडिया बंगलौर की एक कंपनी है जिसके प्रमुख इसरो के पूर्व अधिकारी एमजी चंद्रशेखर हैं. डॉचे टेलीकॉम भी इसमें हिस्सेदार है.
देवास मल्टीमीडिया को आवंटित फ़्रिक्वेंसी कभी दूरदर्शन इस्तेमाल करता था जिससे उपग्रह के ज़रिए कार्यक्रम प्रसारित किए जाते थे लेकिन आज इसकी काफ़ी व्यवासायिक क़ीमत है.
विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को गंभीर करार देते हुए तुरंत इसकी जांच कराए जाने की मांग की है.
भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने एक प्रेस वार्ता के ज़रिए कहा, ''यह मामला 2जी आवंटन घोटाले से भी बड़ा है. अंतरिक्ष विभाग सीधे प्रधानमंत्री के अधीन है. हमारी मांग है कि इस मामले की विस्तृत जांच की जाए. साथ ही धोखाधड़ी के तहत जो स्पेक्ट्रम बांटे गए हैं उन्हें तुरंत वापस लिया जाए और इससे सरकार को जितना नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाए.''
बेशकीमती है एस बैंड
2010 में ऐसे ही केवल 15 मेगाहर्ट्ज़ का आवंटन हुआ था जिसके लिए सरकार को करीब 67 हज़ार करोड़ की कमाई हुई थी.
बताया जा रहा है कि अंतरिक्ष आयोग ने जुलाई, 2010 में देवास मल्टीमीडिया के साथ अनुबंध का विरोध किया था लेकिन फिर भी समझौता किया गया.
रिपोर्टों के मुताबिक कैग ने अंतरिक्ष मामलों के विभाग से पूछा है कि बिना बोली लगाए एस-बैंड के स्पेक्ट्रम का आवंटन क्यों कर दिया गया.
हिंदू बिज़नेस लाइन का कहना है कि इसरो ने देवास मल्टीमीडिया पर स्पेक्ट्रम को आगे बेचने पर भी कोई रोक नहीं लगाई है.
ये पहली बार है कि एस बैंड को निजी क्षेत्र के लिए खोला गया है.














