नीतीश ने मंत्रियों समेत शपथ ली

नीतीश कुमार

बिहार में तीन चौथाई बहुमत से जीत हासिल करने के बाद नीतीश कुमार ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेता नीतीश कुमार के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल के नेता सुशील मोदी ने भी शपथ ली. वे एक बार फिर उपमुख्यमंत्री का पद संभालेंगे.

इन दोनों के अलावा, 28 अन्य लोगों को मंत्रिपद की शपथ दिलाई गई है. ये सभी कैबिनेट स्तर के मंत्री हैं.

पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस विशाल आयोजन में राज्यपाल देवानंद कुँवर ने शपथ दिलाई. इस समारोह में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और जनता दल यूनाइटेड के नेता शरद यादव मौजूद थे.

दस नए चेहरे

नीतीश कुमार ने बिहार के 32वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. वैसे वे तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं. अपनी पहली पारी में बहुमत के अभाव में इस पद पर सिर्फ़ सात दिन ही रह पाए थे.

आज नीतीश कुमार के साथ जिन 29 मंत्रियों ने शपथ ली उनमें से 19 जेडीयू के और 11 भाजपा के सदस्य हैं.

इन मंत्रियों में से दस ऐसे चेहरे हैं जो नीतीश कुमार के पुराने मंत्रिमंडल में नहीं थे.

नीतीश कुमार और सुशील मोदी

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इस मंत्रिमंडल में एक चेहरा परवीन अमानुल्लाह का भी है. वे नीतीश सरकार के कैबिनेट सचिव अफ़ज़ल अमानुल्लाह की पत्नी हैं.

इस मंत्रिमंडल में पुराने मंत्रिमंडल में शामिल नौ लोगों को शामिल नहीं किया गया है. इसमें से सात जेडीयू के और दो भाजपा के सदस्य हैं. ये वो लोग हैं जो चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुँचे हैं.

जिन प्रमुख लोगों को इस बार जगह नहीं मिली है, उनमें पूर्व बिजली मंत्री रामाश्रय सिंह, पूर्व शिक्षा मंत्री हरिनारायण सिंह और पूर्व पर्यटन मंत्री रेणुका देवी हैं.

नीतीश पुराने मंत्रिमंडल के पाँच सदस्य इस बार चुनाव नहीं जीत सके हैं.

जातिगत समीकरणों के हिसाब से इस मंत्रिमंडल में तीन ब्राह्मण, चार भूमिहार, चार राजपूत, चार महादलित, तीन वैश्य, तीन अति पिछड़ा, तीन यादव, दो कुर्मी, दो कुशवाहा और दो मुस्लिम सदस्य हैं. नीतीश कुमार ख़ुद कुर्मी हैं.

नियमानुसार नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में 37 सदस्य हो सकते हैं. इस लिहाज से उनके मंत्रिमंडल में अब सात जगहें रिक्त हैं.

उल्लेखनीय है कि एक महीने लंबे चुनावों के बाद जेडीयू-भाजपा गठबंधन ने राज्य विधानसभा की 243 सीटों में से 206 सीटें जीत ली थीं.

विपक्षी गठनबंधन राष्ट्रीय जनता दल और लोकजनशक्ति पार्टी को सिर्फ़ 25 सीटों से संतोष करना पड़ा था. कांग्रेस को केवल चार सीटों पर जीत हासिल हुई.

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