ओबामा भोपाल मामले में कार्रवाई करें: गैस पीड़ित

वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के सैकड़ों पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे पाँच ग़ैर-सरकारी संगठनों ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से गुहार लगाई है कि वे पीड़ितों को न्याय दिलाने और डाओ केमिकल्स को भारतीय अदालतों के प्रति जवाबदेह बनाने में भूमिका निभाएँ.

भोपाल में 31 जून 1984 को यूनियन कारबाईड के कारखाने से मिथाइल आईसोसाइनेट गैस के लीक होने के कारण, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 15 हज़ार लोग मारे गए हैं और पाँच लाख लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं.

जीवित बचे अनेक भोपाल गैस पिड़ितों और भोपाल में ज़हरीले भूजल की मार झेल रहे अनेक लोग राष्ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली आएँगे और माँग करेंगे कि वे डाओ और यूनियन कारबाईड कंपनियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें.

पाँच ग़ैर-सरकारी संगठनों - भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा, भोपाल गैस पीड़ित महिला कर्मचारी संघ, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा, चिल्ड्रन अगेंस्ट डाओ-कारबाईड और भोपाल ग्रुप फ़ॉर इंफ़ॉरमेशन एंड एक्शन ने एक बयान जारी कर ये माँग उठाई है.

'डाओ-यूनियन कारबाईड जवाबदेह हों'

हम ओबामा से ये माँग करने जा रहे हैं कि वे अपने राष्ट्रपति पद के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दोनों अमरीकी कंपनियों को भारतीय अदालतों के प्रति जवाबदेह बनाएँ

रशीदा बी, भोपाल गैस पीड़ित महिला कर्मचारी संघ

भोपाल गैस पीड़ित महिला कर्मचारी संघ की रशीदा बी का कहना है, "हम ओबामा से ये माँग करने जा रहे हैं कि वे अपने राष्ट्रपति पद के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दोनों अमरीकी कंपनियों को भारतीय अदालतों के प्रति जवाबदेह बनाएँ."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि यूनियन कारबाईड के तब रहे चेयरमैन वॉरन एंडरसन पिछले 18 साल से भारतीय अदालत को भगोड़े हैं और भूजल और भूमि में ज़हर घुलने के मामले में पाँच साल से डाओ केमिकल्स राज्य के हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को मानने से इनकार कर रही है.

रशीदा बी ने कहा है, "हज़ारों लोग बुरी तरह से बीमार हैं और सैकड़ों की समय से पहले मृत्यु हो रही है. आज सैकड़ों शिशु विकृतियों के साथ पैदा हो रहे हैं और उनके माँ-बाप जिगर, गुर्दे और फेंफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त हैं."

भोपाल ग्रुप फ़ॉर इंफ़ॉरमेशन एंड एक्शन सतीनाथ सारंगी का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने साथ इतना बड़ा औद्योगिक प्रतिनिधिमंडल लेकर आ रहे हैं और यदि वे अमरीकी उद्योग को बढ़ावा देना चाहते हैं तो उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वे भारत में सक्रिय अमरीकी कंपनियों को यहाँ के क़ानूनों के प्रति जवाबदेह बनाएँ.

चिल्ड्रन अगेंस्ट डाओ-कारबाईड की साफ़रीन ख़ान ने कहा है कि जहाँ ओबामा ने ब्रितानी पेट्रोलियम कंपनी बीपी के ख़िलाफ़ मेक्सिको की खाड़ी में हुए घटनाक्रम के बाद कड़ी कार्रवाई की है वहीं उनसे उम्मीद की जाती है कि वे डाओ और यूनियन कारबाई को भी उसी तरह जवाबदेह बनाएँ.

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