चुनावी अखाड़े में आडवाणी भी उतरे

इस बार के बिहार चुनाव में ये पहली बार हो रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी प्रचार के लिए बिहार में थे.

समझा जाता है कि नीतीश कुमार ने पहले चरण के इलाकों में बड़ी संख्या मुसलमान वोटरों के होने के कारण इन्हें प्रचार से दूर रखा था.

दूसरे चरण में उत्तर बिहार की 45 सीटें है जिनके तीन ज़िलों का दौरा भाजपा नेता आडवाणी ने मंगलवार को किया.

इन सीटों पर मतदान 24 अक्तूबर को होना है. दरभंगा शहर के मारवाड़ी कॉलेज के मैदान में अच्छी खासी भीड़ जमा थी. कुछ ही देर में मोतिहारी और मुज़्ज़फ़रपुर होते हुए आडवाणी का उड़नखटोला जब मारवाड़ी कॉलेज के मैदान पर उतरा तो धूल के गुबार ने सबके चेहरे रंग दिए.

हेलीकॉप्टर से उतरते ही ब्लैक कमांडो के सुरक्षा घेरे मे आडवाणी ने मंच पर पहुंच कर सबसे पहले मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए एनडीए की पीठ इस बात पर थपथपाई कि इस अंचल की भाषा मैथिली को संविधान में उचित स्थान दिलाने मे इस गठबंधन ने अहम भूमिका निभाई थी.

आडवाणी ने केंद्र सरकार और खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा,''कांग्रेस पार्टी ने इस देश पर सबसे लंबे समय तक राज किया है. उनके शासनकाल में महंगाई आसमान छूती है, भ्रष्ट्राचार बढ़ता है. वाजेपयी जी की सरकार में किसी भी चीज़ की कीमत नहीं बढ़ी. एनडीए ने हमेशा ऐसी सरकार दी है जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे.''

बिहार में एनडीए की सरकार की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा,''इस चुनाव में भी जनता से अनुरोध है कि वो सरकार के काम का मूल्यांकन करे और तब वोट डाले. पर मैं आपके चेहरे से पढ़ पा रहा हूँ कि आपने तय कर लिया है कि अगली बार भी नीतिशजी को मुख्यमंत्री और सुशील मोदी को उपमुख्यमंत्री आप बनते देखना चाहते हैं.''

विकास का अभाव

महज़ इस बात के अलावा, आडवाणी के पूरे भाषण मे स्थानीय सरोकारों का ज़िक्र नहीं था. दरभंगा बाढ़ और सूखाड़ के पाट में फंसा हुआ ज़िला है.

कांग्रेस पार्टी ने इस देश पर सबसे लंबे समय तक राज किया है. उनके शासनकाल में महंगाई आसमान छूती है, भ्रष्ट्राचार बढ़ता है. वाजेपयी जी की सरकार में किसी भी चीज़ की कीमत नहीं बढ़ी. एनडीए ने हमेशा ऐसी सरकार दी है जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे.

लालकृष्ण आडवाणी

यहां के कई उद्योग,चीनी मिल जो बरसों पहले बंद हुए, उनके उद्धार के लिए ज़मीनी स्तर पर कुछ हुआ नहीं दिखता. बदलाव के नाम पर सड़कें जरूर यहां भी दिखती हैं लेकिन शहर के भीतर गंदगी-बदहाली का हाल वैसा ही है.

दरभंगा ज़िले में दस विधानसभा क्षेत्र हैं. इस ज़िले में सवर्णों और मुसलमानों की आबादी ज़्यादा है और पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन उस परंपरा को टूटे ज़माना हो गया. राष्ट्रीय जनता दल ने उसके बाद इस इलाके में अपना प्रभाव बढ़ाया.

दिलचस्प बात इस इलाके की ये है कि 2005 के विधानसभा चुनाव में जब हवा एनडीए की थी और सरकार भी उनकी बनी, दस में से छह सीटें लालू यादव के खा़ने में आईं.

इस बार राजद से आठ प्रत्याशी,लोकजनशक्ति पार्टी से दो, भाजपा के पास हैं छह

और जदयू के पास चार सीटें है. परिसीमन के कारण कुछ सीटों पर दिलचस्प मुकाबला होगा जिसमें प्रमुख सीट कुशेश्वर स्थान है जो कि अब आरक्षित सीट में तब्दील हो गई है.

इस बार सवर्णो का रूझान इस ज़िले मे किस तरफ़ जाएगा, लोग इसका अंदाजा़ लगाने की कोशिश कर रहे हैं. क्या उनके लिए उनकी पुरानी पंसदीदा पार्टी काग्रेंस कोई उम्मीद ले कर आई है?

इन सवालों के बीच लाल कृष्ण आडवाणी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि विकास पर वोट दो. पर इस विकास में दरभंगा का कितना विकास हुआ है ये मतदाताओं को तय करना है.

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