शिक्षिका की पिटाई से आंख गई

पिया का एम्स और कई अन्य जगह इलाज़ हुआ लेकिन आंख ठीक नहीं हुई

बाल मन के सपने बहुत अल्हड,निर्मल और निर्दोष होते है.लेकिन राजस्थान के झुंझुनू जिले में सात साल की पिया को ऐसे सुनहरे ख़्वाब देने वाली एक आँख ही चली गई.

पिया और उसके परिजनों का आरोप है कि उसकी स्कूल की अध्यापिका ने आँख पर ऐसा प्रहार किया कि उसकी एक आँख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई.

तब से पिया की माँ ओमवती इंसाफ़ के लिए हर उस दरवाजे पर दस्तक दे रही है जो बेटी के साथ हुए नाइंसाफ़ी के लिए न्याय दिला सके.

झुंझुनू पुलिस ने ओमवती की रिपोर्ट पर ज़मानत योग्य धाराओं के तहत स्कूल की शिक्षिका प्रतिभा सिंह के विरुद्ध अदालत में अभियोग पत्र दाखिल कर दिया पर ओमवती इससे संतुष्ट नहीं है.

ऐसी कोई घटना हमारे स्कूल मे नहीं हुई.ऐसा लगता है कि इसके पीछे राजनीति है,क्योंकि स्कूल के निदेशक भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं.

स्कूल प्रिंसिपल

वो चीख़ चीख़ कर पूछती है, ‘‘क्या इतने बड़े गुनाह पर इतना भर काफी है.’’

स्कूल के प्रिंसिपल महेश ने बीबीसी से अपने स्कूल में ऐसी किसी भी घटना से ही इंकार कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी कोई घटना हमारे स्कूल मे नहीं हुई. ऐसा लगता है कि इसके पीछे राजनीति है, क्योंकि स्कूल के निदेशक भारतीय जनता पार्टी के नेता है.’’

शिक्षिका ने इनकार किया

स्कूल के प्रिंसिपल ने ये जरूर स्वीकार किया कि पुलिस ने उनकी एक शिक्षिका प्रतिभा के विरुद्ध इस मामले में चालान दाखिल किया है. उधर प्रतिभा ने भी बालिका को पीटने की किसी घटना से साफ़ इंकार किया है.

झूंझुनू के पुलिस अधीक्षक अमित लाम्बा ने बीबीसी से कहा, ‘‘बालिका की मां की रिपोर्ट पर हमने शिक्षिका के विरुद्ध अदालत में चालान पेश कर दिया है.अब अदालत न्याय करेगी.’’

ओमवती का आरोप है कि पुलिस ने बड़ी मुश्किल से पहले तो रिपोर्ट दर्ज की और फिर ऐसा कमजोर मामला बनाया कि शिक्षिका को हाथों हाथ थाने पर ही ज़मानत मिल गई. बकौल ओमवती पिया को इसलिए पीटा गया, क्योंकि वो होमवर्क पूरा नहीं कर पाई थी.

पिया और ओमवती

पिया की माँ ओमवती उसके इलाज के लिए जगह-जगह गईं

ये हादसा ऐसे वक़्त हुआ जब ओमवती के पति वीरेंदर सिंह सरहद के निगेहबान होकर ड्यूटी अंजाम दे रहे थे.वो सेना में नायब सूबेदार है.

ओमवती कहती हैं, ''मेरे पति सेना में है. उनके तीन भाई भी फौज में है. मेरे नाना फौज में थे. मेरे चाचा भी सेना में थे. मैं बेटी को भी फौज में ऊँचा अफसर बनाना चाहती थी.''

ओमवती इससे ज्यदा कुछ नहीं बोल पाई क्योंकि उनका गला रुंध गया और आंखे सजल हो गई.

बड़ी होगी तो क्या होगा

उन्होंने कहा, ''मैंने ना जाने कितने सपने देखे थे, कल ये बड़ी होगी तो उसमे आँख की खातिर हीन भावना पैदा हो जाएगी".

सात साल की पिया को लेकर इलाज के लिए ओमवती कहाँ कहाँ नहीं गईं. वो राजस्थान के हर बड़े अस्पताल गईं.

पिया चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल गई. आर्मी अस्पताल के चिकित्सकों और दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों ने भी पिया की आंख का इलाज किया. मगर उस आँख के आगे पसरा अँधेरा कोई ओझल नहीं कर पाया.

स्कूल के स्तर पर ये एक गंभीर अपराध है. ये काफी नहीं है कि महज मामूली धाराओ में शिक्षिका के विरुद्ध चालान कर दिया. स्कूल के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई और पिया को इस चोट की भरपाई करने वाला कोई इंसाफ नहीं मिला.

मानवाधिकार कार्यकर्ता

ओमवती कहती हैं कि उन्हें मुंह बंद करने के लिए धमकियां मिली.

जयपुर के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील एक के जैन कहते है, ''स्कूल के स्तर पर ये एक गंभीर अपराध है. ये काफी नहीं है कि महज मामूली धाराओ में शिक्षिका के विरुद्ध चालान कर दिया. स्कूल के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई और पिया को इस चोट की भरपाई करने वाला कोई इंसाफ नहीं मिला.''

नन्ही पिया की उम्र अभी ऐसी नहीं है कि वो उस संविधान को पढ़े जो हर पन्ने पर इंसाफ और बराबरी की मोहक इबारतों से लबरेज़ है. ना जाने पिया तब क्या सोचेगी जब वो बड़ी होगी और उन इबारतो को पढ़ेगी जो न्याय की मुनादी करते हैं.

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