लेह: मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

लेह

अधिकारियों ने आशंका जताई है कि लेह में बादल फटने के बाद आई बाढ़ की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. इस हादसे में अब तक 132 लोग मारे गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि अब भी सैकड़ों लोग लापता हैं. लापता लोगों की संख्या चार सौ के क़रीब बताई जा रही है.

साथ ही लेह में राहत और बचाव कार्य चुनौती बना हुआ है. रविवार को राहत सामग्री लेकर छह उड़ानें लेह पहुँचीं.

जम्मू कश्मीर के पुलिस प्रमुख कुलदीप खोड़ा का कहना है कि सेना और पुलिस के सैकड़ों जवान रास्तों को साफ़ कर अलग थलग पड़ गए गांवों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं.

उनका कहना था कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है. पुलिस का कहना है कि क़रीब चार सौ लोग इस हादसे में घायल हुए हैं.

लेह शहर सहित आसपास के कई गांव बादल फटने से अचानक आई बाढ़ से तबाह हो गए हैं. दलदल और मलबे के बीच राहत और बचाव कार्य चल रहा है.

डॉक्टरों का एक दल दवाइयों की एक बड़ी खेप लेकर वहाँ पहुँचा है. बाढ़ ने लेह की संचार व्यवस्था को भी नुक़सान पहुँचाया है.

लापता

अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित लेह के बाहरी हिस्से में स्थित चोगलमसर गाँव हुआ है.

इस समय हमारी प्राथमिकता जीवित बचे लोगों का पता लगाना और उन्हें बचाना है.

नवांग रिगज़िन जोरा, जम्मू कश्मीर के पर्यटन मंत्री

यह गाँव लगभग पूरी तरह से तबाह हो गया है और अब भी वहाँ से डेढ़ सौ लोग लापता बताए जाते हैं.

इसी तरह श्योंग गाँव में रहने वाले क़रीब सौ मज़दूरों का भी अभी तक कोई पता नहीं चल सका है.

जिन इलाक़ों में बाढ़ आई है वहाँ कई सैनिक चौकियाँ थीं.

अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ इन चौकियों को बहा ले गई और उन पर तैनात कोई 25 सैनिकों का अता-पता नहीं है.

जम्मू कश्मीर के पर्यटन मंत्री नवांग रिगज़िन जोरा लेह में राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी से उन्होंने कहा, "इस समय हमारी प्राथमिकता जीवित बचे लोगों का पता लगाना और उन्हें बचाना है."

पूरे इलाक़े में कई जगह घुटने-घुटने तक दलदल भर गया है.

अधिकारियों का कहना है कि बड़े होटलों को बहुत नुक़सान नहीं पहुँचा है इसकी वजह से पर्यटकों को जानमाल का ज़्यादा नुक़सान नहीं हुआ है.

हवाई अड्डे की मरम्मत के बाद लेह से विमानों का आना जाना शुरु हो गया है और उम्मीद की जा रही है कि इससे कुछ पर्यटकों को वहाँ से निकलने में सुविधा होगी.

लेकिन लेह और शेष दुनिया के बीच टेलीफ़ोन संपर्क अब भी बुरी तरह से प्रभावित है क्योंकि लेह स्थित बीएसएनएल का एक्सचेंज इस बाढ़ में बह गया है.

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