आंध्र के प्रोफ़ेसर का विश्व रिकॉर्ड

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सबसे लंबे नाम वाली किताब का रिकॉर्ड पहले मिस्र के लेखक के नाम था

आंध्र प्रदेश में अंग्रेज़ी के एक सहायक प्रोफ़ेसर ने विश्व में किसी भी पुस्तक के सबसे लंबे टाइटल या नाम का नया गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है.

महबूबनगर के पलामुरु विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी की शिक्षा देने वाले वी श्रीनाथ चारी को उनकी उस पुस्तक के लिए ये सम्मान मिला है जो उन्होंने अंग्रेज़ी भाषा के शब्दों, मुहावरों, शैली और वाक्यों को स्पष्ट करने और उनका प्रयोग सिखाने के लिए लिखी है.

109 पृष्ठ की इस पुस्तक में तेलुगु भाषा जानने वाले छात्रों के लिए अंग्रेज़ी भाषा को सरल बनाने की कोशिश की गई है और यह भी बताया गया है कि किस शब्द या कहावत की क्या पृष्ठभूमि है और उससे क्या दिलचस्प कहानियां जुडी हुई हैं. इसके लिए चित्रों का भी इस्तेमाल किय़ा गया है.

लेकिन इस किताब में शायद सबसे दिलचस्प पहलू उसका पहला पन्ना है जिसपर ऊपर से नीचे तक किताब का नाम ही लिखा हुआ है.

इस नाम में 1086 शब्द और 5633 अक्षर हैं. ये नाम "HANDY CRYSTALS" से शुरू होता है. चारी का कहना था, "ये नाम मैंने इसलिए चुना कि इस किताब की हर बात क्रिस्टल या बिल्लौर की तरह साफ़ है."

इसी के साथ प्रोफ़ेसर श्रीनाथ ने मिस्र के लेखक एस्साम का रिकॉर्ड तोड़ा है जिनकी पुस्तक का नाम 301 शब्दों पर फैला हुआ था.

गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से प्रोफ़ेसर चारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उनकी इस उपलब्धि का विवरण उनके रिकॉर्ड्स में शामिल कर लिया गया है और वह विश्व रिकॉर्ड रखने वाले व्यक्तियों के क्लब में शामिल हो गए हैं.

प्रेरणा

सबसे लंबे नाम वाली किताब

किताब के नाम में कुल 1086 शब्द और 5633 अक्षर हैं.

चारी का कहना था कि इस तरह की किताब लिखने और इसे इतना लंबा नाम देने का विचार उन्हें उस समय आया जब वह विलियम शेक्सपियर की किताब पढ़ रहे थे जिसमें उन्होंने लिखा है कि एक विद्वान में तीन विशेषताएं होनी चाहिए.

एक तो उसे अतीत के महान विद्वानों के आदर्श पर चलना चाहिए, दूसरा उसे अपनी विद्या पर अपने अंदाज़ में अमल करना चाहिए और तीसरे उसे कुछ नया काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "भाषा सिखाने वाले एक व्यक्ति के रूप में मैं कुछ नया प्रयोग करना चाहता था".

प्रोफ़ेसर चारी का कहना है की वह छात्रों को अच्छी से अच्छी अंग्रेज़ी सिखाने की कोशिश इसलिए कर रहे हैं कि आज की दुनिया में इस भाषा का जानना बहुत ज़रूरी और महत्वपूर्ण हो गया है.

उनका कहाना है, "स्वयं हैदराबाद में इतनी सारी आईटी कंपनिया स्थापित हो गई हैं और अंग्रेज़ी सीखना समय की सबसे बड़ी ज़रुरत बन गई है."

चारी एक छोटे से गाँव में एक स्कूल मास्टर के घर पैदा हुए और गाँव में ही तेलुगु भाषा में शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने अपने पिता के प्रोत्साहन पर अंग्रेज़ी सीखी और अब वह इसके एक ऐसे विशेषज्ञ बन गए हैं जिनको हर कोई मानता है.

अंग्रेज़ी के विद्वान होने के साथ-साथ चारी मनोविज्ञान में एमए भी हैं और कॉउन्सलिंग भी करते हैं और उन्होंने इसे भी अंग्रेज़ी सिखाने के लिए इस्तेमाल किया है.

उनकी इस उपलब्धि की काफ़ी तारीफ़ भी हुई है. पलामुरु विश्वविद्यालय के कुलपति गोपाल रेड्डी ने उनकी तारीफ़ करते हुए कहा कि इससे दूसरे विद्वानों को भी प्रोत्साहन मिलेगा.

चारी ने कहा कि उन्हें इस बात की भी ख़ुशी है कि वह अपने गृह ज़िले महबूबनगर के पहले व्यक्ति हैं जिन्हें गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड का सम्मान मिला है. इसी तरह वह देश में पहले सहायक प्रोफ़ेसर हैं जिन्हें अपने काम के लिए ये सम्मान दिया गया है.

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