हाथियों का गांव

महावत कहते हैं उनकी बरसों की मुराद पूरी हुई है.

राजस्थान में वैसे तो चालीस हज़ार गांव हैं लेकिन जयपुर के निकट कुंडा में स्थापित ‘हाथी गांव’ इन सबसे न्यारा है.

इसे उन हाथियों का ठिकाना बनाया गया है जो देसी-विदेशी सैलानियों को अपनी पीठ पर लाद कर ऐतिहासिक आमेर किले के दर्शन कराते हैं.

राज्य के पर्यटन विभाग का कहना है कि ये भारत का पहला हाथी गांव है. इसमें कोई एक सौ से ज़्यादा हाथी और उनके पारंपरिक पालनहार महावत निवास करेंगे.

राज्य की पर्यटन मंत्री बीना काक ने जब शनिवार को इस अनूठे हाथी गांव का उद्घाटन किया तो महावतों के मुंह से बरबस निकला कि उनकी दशकों पुरानी मुराद पूरी हो गई है.

हाथी मालिक संघटन के अध्यक्ष अब्दुल रशीद कहते हैं, “हमारे और हमारे लाडले हाथियों के लिए ये गांव बड़ी नियामत है. कोई 120 बीघा धरती पर फैले इस गांव में जब सजे धजे हाथियों ने अपने महावतों के साथ दाख़िला लिया तो जश्न का समां था. गीत संगीत के बीच महावत एक दूसरे को मुबारक़बाद दे रहे थे.”

पर्यटन मंत्री काक ने बीबीसी को बताया, “हम इसे एक पर्यटन स्थल की तरह विकसित करना चाहते है. यहाँ वन्य प्रेमी आएं, हाथियों पर शोध करने वाले लोग आएं और इन दुलारे हाथियों पर अध्ययन करें.”

जयपुर में नयनाभिराम आमेर किले को देखने हर साल कोई चौदह लाख सैलानी आते है.

इनमें चार लाख विदेशी होते है. इन सभी की चाहत हाथी पर सवार होकर किले तक जाने की रहती है लेकिन इस काम में लगे हाथियों की संख्या 113 है. इनमें मादा हाथियों का बहुमत है जबकि नर हाथी महज चार है.

हमारे और हमारे लाडले हाथियों के लिए ये गांव बड़ी नियामत है. कोई 120 बीघा धरती पर फैले इस गांव में जब सजे धजे हाथियों ने अपने महावतों के साथ दाख़िला लिया तो जश्न का समां था. गीत संगीत के बीच महावत एक दूसरे को मुबारक़बाद दे रहे थे

अब्दुल रशीद, अध्यक्ष, हाथी मालिक संघटन

हाथी गांव में पहले दौर में कोई 51 हाथियों को जगह दी गई है. बाद में और भी हाथियों को यहां लाया जाएगा.

हाथी गांव में एक मानव निर्मित तालाब भी बनाया गया है, जहां हाथी शुष्क मौसम में स्नान कर सकेंगे.

पर्यटन मंत्री काक का कहना है, “ये बड़ा ख़ूबसूरत मंज़र होगा जब हाथी यहाँ पानी में अठखेलियां करेंगे.”

हाथी गांव में इन वन्य प्राणियों की देखभाल के लिए चिकित्सा सुविधा भी होगी.

महावत इतिहास

जयपुर में हाथियों की देखभाल करने वाली महावत बिरादरी का इतिहास राजे रजवाड़ों के साथ साथ चला है.

महावत बिरादरी के प्रमुख मोहम्मद हनीफ़ कहते हैं, “जयपुर के तत्कालीन राजा मान सिंह प्रथम को महावतों को बसाने का श्रेय जाता है. जयपुर बसने के पहले महावत पुरानी राजधानी आमेर में रहते थे. बाद में जयपुर बसा तो रियासत ने गुलाबी नगरी में मोहल्ल्ला महावातन में हमें जगह दी. आज भी वहां कोई सात हवेलियां है. उस दौर में हमारी बहुत इज़्ज़त शोहरत थी. वो शाही दौर था हमें बहुत सम्मान मिलता था.”

हनीफ़ कहते है कि इस समय जयपुर में इस बिरादरी के कोई चौदह हज़ार लोग आबाद है. हाथी मालिक संघ के उपाध्यक्ष श्याम गुप्ता कहते हैं उनका परिवार सदियों से इस काम में जुटा है.

श्याम गुप्ता कहते हैं, “हाथी पालना आज ज़्यादा फ़ायदे का काम नहीं है. एक हाथी एक दिन में चार बार सवारी ढोता है और हर सवारी के लिए हाथी मालिक को नौ सौ रूपए मिलते है. इसमें से दो सौ रूपए हाथी कल्याण में जमा हो जाते है.”

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