हैदराबाद की जेल में बीपीओ

जेल

देश के किसी जेल में बीपीओ खोलने का यह पहला प्रयास है

आंध्र प्रदेश सरकार ने देश में अपनी तरह का एक अनोखा क़दम उठाते हुए एक जेल में बीपीओ केंद्र स्थापित करने जा रही है, जहाँ पढ़े लिखे क़ैदी काम करेंगे.

यह बीपीओ केंद्र जेल विभाग और एक निजी आईटी कंपनी रेडियंट इन्फ़ो सिस्टम्स के सहयोग से हैदराबाद के निकट चिर्लापल्ली की जेल में स्थापित किया जाएगा.

जेल विभाग के महानिदेशक गोपीनाथ रेड्डी ने बीबीसी को बताया कि चिर्लापल्ली जेल में इस बीपीओ के लिए जगह चुन ली गई है.

राज्य की इस सबसे बड़ी और अति आधुनिक जेल में इस समय 2100 क़ैदी हैं, जिनमें कोई 40 प्रतिशत पढ़े लिखे हैं.

गोपीनाथ रेड्डी का कहना है, "हम इस बीपीओ के लिए उन लोगों को चुनेंगे जो इसमें काम कर सकेंगे और जिनकी इच्छा होगी. ऐसे 250 क़ैदियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनसे काम लिया जाएगा".

रेडियंट इन्फ़ो सिस्टम्स के निदेशक के नारायणा चर्युलू का कहना था कि इस केंद्र में 70 कंप्यूटर लगाए जाएंगे, जहाँ तीन शिफ्ट में लगातार काम होगा.

काम

हम इस बीपीओ के लिए उन लोगों को चुनेंगे जो इसमें काम कर सकेंगे और जिनकी इच्छा होगी. ऐसे कोई 250 क़ैदियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनसे काम लिया जाएगा

जेल विभाग के महानिदेशक गोपीनाथ रेड्डी

नारायणा चर्युलू कहते हैं, "यह कॉल सेंटर नहीं होगा, बल्कि इसके ज़रिए कंप्यूटर में डाटा एंट्री और इंटरनेट के ज़रिया सूचना दूसरी जगह भेजने का काम होगा. अधिकतर हम बैंकों के लिए यह काम करेंगे."

इससे पढ़े लिखे क़ैदियों को कितना लाभ मिलेगा इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इस समय इन क़ैदियों की कड़ी मेहनत के बाद केवल 15 रुपए रुपए प्रतिदिन का वेतन मिलता है. इसके लिए उन्हें कपड़े बुनने से लेकर लोहे का फर्नीचर और फिनाइल बनाने तक के काम करने पड़ते हैं, लेकिन जिन लोगों को इस बीपीओ में काम मिलेगा उन्हें प्रारंभ में ही प्रति महीना पांच हज़ार रुपए वेतन मिलेगा.

लेकिन यह पूरे पैसे क़ैदियों को नहीं दिए जाएंगे. गोपीनाथ रेड्डी का कहना था कि इसमें से वो खर्चा निकला जाएगा जो जेल प्रशासन इन क़ैदियों पर लगाता है.

उनका कहना है, "इस परियोजना के पीछे हमारा उद्देश्य यह है कि पढ़े लिखे क़ैदियों को भविष्य के लिए तैयार किया जाए ताकि जब वो जेल से छूटें तो बाहर की दुनिया में अपना स्थान बना सकें."

सरकार से मंज़ूरी मिलते ही इस केंद्र की स्थापना पर काम शुरू हो जाएगा और चार महीनों में यह बीपीओ तैयार हो जाएगा.

रेड्डी ने कहा कि अगर यह परियोजना सफल होती है तो राज्य की दूसरी जेलों में भी इसका विस्तार क्या जाएगा.

राज्यभर की अनेक जेलों में इस समय 13 हज़ार महिलाएं और पुरुष अनेक अपराधों की सज़ा काट रहे हैं. इनमें कोई 2000 लोग पढ़े लिखे हैं और अधिकारी चाहते हैं कि उनका उपयोग अच्छे कामों में किया जाए.

इतना ही नहीं अगर बीपीओ चल निकला तो गोपीनाथ रेड्डी कहते हैं कि आगे चलकर जेलों में सॉफ्टवेयर बनाने का काम भी शुरू हो सकता है.

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