क़साब दोषी क़रार, दोनों भारतीय बरी

क़साब

अजमल आमिर क़साब को सभी 86 आरोपों में दोषी पाया गया

मुंबई की एक अदालत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमले के मामले में पाकिस्तानी नागरिक अजमल आमिर क़साब को दोषी करार दिया है.

कथित तौर पर उनका साथ देने वाले भारतीय नागरिकों फ़हीम अंसारी और सबाउद्दीन को संदेह का लाभ देकर सभी मामलों में बरी कर दिया गया है.

क़साब को सभी 86 आरोपों में दोषी पाया गया जिनमें हत्या और देश के खिलाफ़ साज़िश रचने जैसे मामले शामिल हैं.

न्यायमूर्ति एम तहिलयानी की अदालत ने अजमल आमिर क़साब को चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा का सदस्य बताया.

न्यायाधीश तहिलयानी ने अपने फ़ैसले में कहा कि कसाब को छत्रपति शिवाजी टर्मिनट रेलवे स्टेशन में लोगों को मारने, सरकारी अधिकारियों को मारने और अन्य नौ चरमपंथियों को उकसाने के लिए दोषी पाया गया है.

न्यायाधीश ने कहा कि वो सज़ा को घोषणा बाद में करेंगे.

प्रतिक्रिया

पी चिदंबरम

गृहमंत्री ने कहा कि ये फ़ैसला संदेश है कि पाकिस्तान आतंकवाद का निर्यात बंद करे

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि इस मामले से साफ़ है कि भारत में कानून सर्वोपरि है.

उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि ये मुकदमा एक साल में ही पूरा कर लिया गया और मुकदमे के अंत में कसाब को दोषी पाया गया. उन्होंने जाँच एजेंसियों को मुबारकबाद दी.

गृहमंत्री ने कहा कि मामले में दो लोगों को बरी करना ये दिखाता है कि भारतीय न्यायालय कितने स्वतंत्र और निडर होकर काम करते हैं.

उन्होंने कहा कि न्यायालय का फ़ैसला पाकिस्तान के लिए संदेश है कि वो भारत में आतंकवाद निर्यात करना बंद करें.

पी चिदंबरम ने कहा कि अगर पाकिस्तान ऐसा नहीं करता और चरमपंथियों को पकड़ा जाता है तो उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी.

कुछ विपक्षी नेता इस मामले की तुलना अफ़ज़ल गुरू के मामले से कर रहे हैं जिन्होंने राष्ट्रपति को रहम की अपील भेज रखी है. इस पर गृहमंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय बारी बारी से हर केस पर विचार कर रहा है.

उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने राष्ट्रपति को रहम की विभिन्न अपीलें भेजी हैं और उस पर फ़ैसला करना राष्ट्रपति के अधिकारक्षेत्र में है.

उधर विधि मंत्री वीरप्पा मोईली ने इसे न्यायालय की जीत बताया.

उन्होंने कहा कि इस मामले से साफ़ है कि देश में कानून का राज मज़बूती से कायम है और अपराधी न्यायपालिका से नहीं बच सकते.

सरकारी वकील

हमने साबित किया कि पड़ोसी देश में आतंकवादियों को किस तरह ट्रेनिंग दी जाती है. हमने साबित किया है कि 26/11 का हमला भारत के साथ युद्ध था. हमने साबित किया है कि हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े़ हैं

सरकारी वकील उज्जवल निकम

सरकारी वकील उज्जवल निकम जब पत्रकारों से बात करने पहुँचे तो वो हाथ में एक मोटी सी फ़ाइल लिए हुए थे. उस पर कसाब की तस्वीर थी और लिखा था, ‘हाँ, तुम कुसूरवार हो’.

उन्होंने कहा, "मुझे दुख है कि फहीम अंसारी और सबाहुद्दीन को बरी कर दिया है, हालांकि ये बाइज़्जत रिहाई नहीं लेकिन उन्हें संदेह का लाभ दिया है."

उज्जवल निकम ने कहा कि वो सरकार को सिफ़ारिश करेंगे कि इस फ़ैसले को चुनौती दी जाए.

उन्होंने फ़हीम अंसारी को कथित तौर पर एक शातिर, खूंखार आतंकवादी बताया और कहा कि उत्तर प्रदेश में रामपुर के पुलिस कैंप में फ़ायरिंग हमले में फ़हीम अंसारी ने हिस्सा लिया था.

उज्जवल निकम ने कहा, “हमने साबित किया कि पड़ोसी देश में आतंकवादियों को किस तरह ट्रेनिंग दी जाती है. हमने साबित किया है कि 26/11 का हमला भारत के साथ युद्ध था. हमने साबित किया है कि हमले के तार पाकिस्तान से जुड़े़ हैं.”

मुक़दमे की शुरुआत

इस मुकदमें की शुरूआत 8 मई 2009 को शुरू हुई थी.

फ़हीम अंसारी के वकील ऐजाज़ नक़वी ने पत्रकारों को बताया कि कोर्ट का कहना था कि 26/11 हमलों में किसी भारतीय का जुड़ाव नहीं है और ये देश के ऊपर हमला था.

ऐजाज़ नकवी के मुताबिक न्यायालय ने कहा कि फ़हीम अंसारी मामले में जिस तरह के प्रमाण रखे गए वो निचले दर्जे के थे.

भारतीय नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने निशाना बने स्थानों का नक्शा तैयार कर उन्हें लश्करे तैबा को नेपाल में सौंपा था.

ऐजाज़ नक़वी के मुताबिक न्यायालय ने कहा कि स्थानों का नक्शा किसी चिट के ऊपर नहीं बनाया गया और जो चिट बरामद हुई उस पर खून का कोई दाग़ नहीं था.

नक़वी ने मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि लगता है कि ये चिट फ़हीम अंसारी और सबाउद्दीन को फंसाने के लिए बनाई गई थी.

उन्होंने कहा कि मुंबई हमलों का नेपाल से कोई ताल्लुक नहीं है.

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