गंगा के लिए विश्व बैंक का ऋण

गंगा

गंगा दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक मानी जाती है

विश्व बैंक गंगा की सफ़ाई के लिए भारत को एक अरब डॉलर का कर्ज़ देने पर सहमत हो गया है. ये राशि अगले पाँच वर्षों में दी जाएगी.

गंगा विश्व की सबसे प्रदूषित नदियों में एक मानी जाती है.

दिल्ली में विश्व बैंक के प्रमुख राबर्ट ज़ोएलिक ने कहा कि इस पहल के दौरान नदी के पूरे ढाई हज़ार किलोमीटर के दायरे का ध्यान रखा जाएगा और प्रदूषण के विभिन्न पहलुओं से निबटा जाएगा.

इस अभियान के दौरान सीवेज संयंत्र स्थापित किए जाएँगे, नालों की व्यवस्था सुधारी जाएगी ताकि जल की गुणवत्ता को सुधारा जा सके.

बुधवार को वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के साथ मुलाक़ात में विश्व बैंक प्रमुख ने एक अरब डालर की वित्तीय सहायता मुहैया कराने की हामी भरी.

इस मौक़े पर जयराम रमेश ने कहा कि गंगा परियोजना राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है. यह खुशी की बात है कि विश्व बैंक इसमें हमारी मदद को आगे आया है.

विश्व बैंक प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि बड़ी नदियों की स्वच्छता बचाए रखना चुनौती भरा काम है और इसमें काफ़ी समय लगता है इसलिए ऐसी परियोजनाओं के प्रति प्रतिबद्धता काफ़ी महत्वपूर्ण है.

प्रदूषण की समस्या

ग़ौरतलब है कि गंगा के तट पर घने बसे औद्योगिक नगरों के नालों की गंदगी सीधे गंगा नदी में मिलने से गंगा का प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है.

अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि बड़ी नदियों की स्वच्छता बचाए रखना चुनौती भरा काम है और इसमें काफ़ी समय लगता है इसलिए ऐसी परियोजनाओं के प्रति प्रतिबद्धता काफ़ी महत्वपूर्ण है.

विश्व बैंक प्रमुख

गंगा को लेकर पहले भी कई प्रयास हुए हैं लेकिन उनमें सफलता नहीं मिली है.

गंगा को राष्ट्रीय धरोहर भी घोषित कर दिया गया है और गंगा एक्शन प्लान व राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना लागू की गई है.

हालांकि इन कोशिशों की सफलता पर सवाल उठते रहे हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इतना सब नाकाफ़ी है और अब भी गंगा के अस्तित्व पर संकट के बादल छाए हुए हैं.

BBC navigation

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.