
भारत में अभी भी हर दिन प्रसव के दौरान 300 महिलाओं की मौत हो जाती है.
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत भले ही तेजी से बढ़ रहे देशों में से एक हो लेकिन यहाँ लैंगिक समानता का स्तर अभी भी दयनीय है.
हाल में लैंगिक समानता के स्तर को मापने के लिए 134 देशों में एक सर्वेक्षण करवाया गया जिसके बाद यह बात सामने आई कि इस क्षेत्र में मौजूदा स्थिति के आधार पर भारत 114 वें स्थान पर आता है.
यह सर्वेक्षण विश्व आर्थिक मंच ने करवाया था जिसे दिल्ली में चल रही एक बैठक के दौरान जारी किया गया.
इस सर्वेक्षण में महिलाओं और पुरुषों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा और जीवन प्रत्याशा को आधार बनाया गया था.
इस सर्वेक्षण में भारत की रैंकिंग बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों से भी पीछे है.
जेनेवा स्थित विश्व आर्थिक मंच ने महिलाओं और पुरुषों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य क्षेत्रों में फ़र्क पर कड़ी टिप्पणियाँ की है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 'गुमशुदा' नारियों की बड़ी तादाद की यही वजह है.
जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रसव से जुड़े मामलों में रोज़ 300 महिलाओं की मौत हो जाती है.
लिंग अनुपात के मामले में भारत में स्थिति और भी गंभीर है और इसमें उसकी रैंकिंग 131 है.















