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भारत में हर तीसरे दिन एक व्यक्ति की कथित फर्ज़ी पुलिस मुठभेड़ में मौत होती है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पिछले लगभग एक साल में फर्ज़ी मुठभेड़ के कम से कम 130 मामले दर्ज हुए. संसद में सरकार ने स्वीकार किया कि यह आँकड़े चिंताजनक हैं. मगर यह स्थिति इतनी भयावह क्यों होती जा रही है इसकी एक नहीं बल्कि कई वजहें बताई जाती हैं. यह वजहें क्या हैं और कौन है इसके लिए ज़िम्मेदार इसका जायज़ा ले रहे हैं रूपा झा और अनीश अहलूवालिया इस विशेष रिपोर्ट में.