
मुसलमानों को रामदेव के शिविर में न जाने की हिदायत
चार दिन पहले देवबंद में मुस्लिम उलेमाओं की बैठक में योग गुरु बाबा रामदेव ने प्राणायम करके दिखाया था.
और तो और एक हिंदू पुजारी ने इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार भी किया था.
लेकिन चार दिन बाद स्थिति बदल गई है. दारूल उलूम ने फ़तवा जारी करके मुसलमानों से कहा है कि वे बाबा रामदेव के योग शिविर में जाने से बचें, क्योंकि शिविर वंदे मातरम के गायन से शुरू होता है.
पिछले दिनों देवबंद में जमीयत उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित करके मुसलमानों से वंदे मातरम न गाने को कहा गया था क्योंकि यह इस्लाम के ख़िलाफ़ है.
वंदे मातरम का गायन प्रार्थना है और मुसलमान अल्लाह को छोड़कर किसी और की प्रार्थना नहीं कर सकता. मुसलमानों को वंदे मातरम नहीं गाना चाहिए
मुफ़्ती एहसान
दारूल उलूम के फ़तवा विभाग के उप प्रभारी मुफ़्ती एहसान ने कहा, "वंदे मातरम का गायन प्रार्थना है और मुसलमान अल्लाह को छोड़कर किसी और की प्रार्थना नहीं कर सकता. मुसलमानों को वंदे मातरम नहीं गाना चाहिए."
हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमान कसरत के रूप में योगाभ्यास कर सकते हैं. दारूल उलूम ने फ़तवा जारी करके वंदे मातरम का विरोध किया था.
हाल ही में जमीयत उलेमा ए हिंद ने भी अपने 30वें राष्ट्रीय अधिवेशन में वंदे मातरम के ख़िलाफ़ फ़तवा का समर्थन किया था.












