'कंपनियों से पैसे मिलते थे'

नक्सली

नक्सलियों ने पश्चिम बंगाल में हाल में एक ट्रेन को कई घंटे जबरन रोके रखा था

पश्चिम बंगाल में एक ट्रेन को रोकने के दो दिन बाद माओवादियों के समर्थकों ने सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के दो समर्थकों को मार दिया है और तीन अन्य का अपहरण कर लिया है.

उधर एक बड़े माओवादी नेता ने पुलिस हिरासत में ये स्वीकार किया है कि कई बड़ी कंपनियों से उनकी पार्टी को लगातार पैसे मिल रहे थे. गिरफ़्तार किए गए कृषि वैज्ञानिक और माओवादी नेता नारला रवि शर्मा ने ख़ुफ़िया एजेंसियों की पूछताछ में ऐसा माना है.

अपहरण और हत्या

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मार्क्सवादी समर्थकों रणजीत, गंगाधर पात्रा और कार्तिक का पिस्तौल की नोक पर पश्चिमी मिदनापुर से अपहरण कर लिया गया.

पुलिस का कहना है कि ये अपहरण कानु-सिद्धु मिलिशिया ने किया.

दो मार्क्सवादी कार्यकर्ताओं तपन मुदी दिलीप माहतो की हत्या कर दी गई.

इस मिलिशिया के अध्यक्ष असित माहतो ने स्थानीय पत्रकारों को बताया कि मार्क्सवादियों ने उनके एक समर्थक का अपहरण किया था. एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि ऐसा 'शायद इसलिए किया गया है ताकि जिन कार्यकर्ताओं का अपहरण किया गया है उनकी अदला-बदली हो सके.'

मिलिशिया ने अनिश्चितकाल की अपनी हड़ताल वापस ले ली है लेकिन उन्होंने कहा है कि वे चत्रधर माहतो की रिहाई के लिए अभियान चलाते रहेंगे, जो पुलिस हिरासत में हैं.

हिरासत में दिया बयान

बीबीसी के पास नारला रवि शर्मा की ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा पूछताछ की सात पन्ने की रिपोर्ट है.

झारखंड पुलिस के अनुसार शर्मा बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष हैं जो माओवादी पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का वर्ष 1997 से हिस्सा है. इसीलिए जो जानकारी उनसे मिली है वह इन दो राज्यों की है.

इस रिपोर्ट के अनुसार शर्मा ने खनन और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों के नाम लिए हैं लेकिन बीबीसी इसलिए इन कंपनियों के नाम सार्वजिनक नहीं कर सकती क्योंकि इन कंपनियों ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है.

शर्मा से हिरासत में ली गई जानकारी के मुताबिक उनका कहना है कि बिहार-झारखंड क्षेत्र में माओवादियों का वार्षिक ख़र्च 70 से 80 लाख रुपए हैं.

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