
महिलाओं के राजनीति में आने का सीधा असर धीरे-धीरे दिखाई पड़ रहा है
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नगरीय स्थानीय निकायों, यानी नगर पालिकाओं और नगर निगमों आदि में महिलाओं को 33 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत आरक्षण दने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.
इसके बाद अब शहरी विकास मंत्रालय संसद के अगले सत्र में एक संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगा.
यह आरक्षण सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा.
नगरी निकायों की उन सभी सीटों पर यह प्रावधान लागू होगा जिसके लिए प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं. जो सीटें अनुसूचित जाति या जनजाति के लिए आरक्षित हैं, वहाँ भी यह आरक्षण लागू होगा.
ग्राम पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान को मंत्रिमंडल पहले ही मंज़ूरी दे चुका है.
राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने गत चार जून को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए इसकी घोषणा की थी.
गुरुवार को मंत्रिमंडल के फैसले के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, "उम्मीद है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी."
उन्होंने उम्मीद जताई कि पानी की आपूर्ति, साफ़-सफ़ाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों में भी महिलाओं के होने से ज़्यादा ध्यान दिया जाएगा.
अल्पसंख्यकों के लिए योजना
मंत्रिमंडल ने अल्पसंख्यकों के लिए प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम में तीन नई योजनाएँ शामिल करने को मंज़ूरी दी है.
इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम शामिल है.
इसके अलावा छोटे और मध्यम शहरों में ढाँचागत विकास योजना को भी मंज़ूरी दी गई है.
अंबिका सोनी के अनुसार, मंत्रिमंडल ने गुड़गाँव की जगह मुसलमान बहुल ज़िले मेवात को इस योजना में शामिल करने के लिए सहमति दे दी है.
उन्होंने बताया कि यह निर्णय भी लिया गया है कि अल्पसंख्यकों के लिए चलाए जा रहे 15 सूत्रीय कार्य्रक्रम की निगरानी के लिए विधायकों और सांसदों को ज़िला व प्रदेश स्तर की समितियों में रखा जाएगा.
इसके अलावा 19वें विधि आयोग के गठन को मंज़ूरी दे दी है.
इस आयोग का कार्यकाल तीन साल सालों का होगा. इसके चेयरपर्सन और सदस्यों की घोषणा विधि मंत्रालय जल्दी ही करेगा.














