मायावती के एक और फ़ैसले पर रोक

मायावती और कांशीराम की मूर्ति

मायावती लगातार स्मारकों का शिलान्यास कर रही हैं.

मायावती सरकार की 'हठधर्मिता' से नागरिकों को राहत दिलाने के लिए हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच को शनिवार को छुट्टी के दिन घर पर अदालत लगानी पड़ी.

न्यायमूर्ति प्रदीपकांत और न्यायमूर्ति आरआर अवस्थी की खंडपीठ ने घर पर लंबी सुनवाई के बाद माया सरकार को आदेश दिया कि फिलहाल दो लाख की आबादी वाले इलाके को पिंजड़े में बंद करने जैसी कार्रवाई न की जाए.

यह मामला जेल तोड़ कर बन रहे कांशीराम ग्रीन पार्क से सटी सड़क को संकरी करने, नाले को पाटने , हरे भरे पेड़ों को काटने और फिर पंद्रह फीट ऊँची चहारदीवारी बनाने का है.

सरकार की इस आनन फानन निर्माण परियोजना को न तो नगर निगम ने अनुमोदित किया है और न ही लखनऊ विकास प्राधिकरण ने.

अधिकारियों के अनुसार सीधे मुख्यमंत्री के आदेश पर यह काम हो रहा था. सरकार के इस क़दम से कृष्णा पल्ली,फौजी कालोनी,गीता पल्ली,आजाद नगर,मधुबन नगर,ओम नगर,कैलाशपुरी,पवन पुरी,मुस्लिम नगर और आस पड़ोस के लगभग दो लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं.

'कालोनी को पिंजड़ा न बनाएँ'

अधिकारियों ने अपनी मज़बूरी बताई और लोगों की बात नहीं सुनी तो लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार को सड़क पर अनधिकृत क़ब्ज़ा करने,उसे संकरी करने,सीवर,हवा और धूप और रोशनी रोकने की अनुमति नही दी जा सकती.

इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और इमरजेंसी में फ़ायर ब्रिगेड जैसी सेवावों का काम बाधित होगा.

अदालत ने इसे लोगों को पिंजड़े में बंद करने की कार्रवाई कहा.

मामले की अगली सुनवाई २२ सितंबर को होगी. अदालत ने उस दिन सभी संबंधित अधिकारियों को भी तलब किया है.

लखनऊ के विभिन्न इलाक़ों में सरकारी ज़मीनों, पार्कों , चौराहों और सड़कों पर मायावती सरकार की स्माराक बनवाने की जिद से अनेकों लोगों को जनहित याचिका के ज़रिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है.

हाईकोर्ट ने लगभग हर मामले में लोगों को राहत दी लेकिन माया सरकार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की कोर्ट से
ऐसे कई आदेश ख़ारिज कराने में कामयाब हो गईं.

लोगों को आशंका है की कहीं इस मामले में भी माया सरकार सुप्रीम कोर्ट न पहुँच जाए.

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