एक और कांशीराम स्मारक का शिलान्यास

मायावती और काँशीराम की प्रतिमाएँ

उत्तर प्रदेश में भारी रक़म ख़र्च करके अनेक ऐसी प्रतिमाएँ बनाई जा रही हैं.

राज्य उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले गुरुवार को राजधानी लखनऊ में एक और बड़े पार्क की आधारशिला रख दी.

यह पार्क बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और मायावती के राजनीतिक गुरू कहे जाने वाले नेता कांशीराम की याद में बनाया जा रहा है.

मायावती ने कहा कि इस निर्माण कार्य से अदालत के आदेश की कोई अवमानना नहीं की गई है.

उनका कहना था कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने दलित महापुरुषों की स्मृति में कोई स्मारक नहीं बनवाया इसलिए वे ऐसा कर रही हैं.

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह के इस बयान पर कि वो सत्ता में आए तो मायावती की मूर्तियों पर बुलडोजर चलवा देंगे, इस पर उनका कहना था,'' मैं साफ़ कर देना चाहती हूँ कि भविष्य में यदि ऐसी कोशिश हुई तो देश में क़ानून व्यवस्था की स्थिति इतनी ख़राब हो जाएगी कि राष्ट्रपति शासन लगाने की ज़रूरत पड़ जाएगी और इसके लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ज़िम्मेदार होगी.''

मैं साफ़ कर देना चाहती हूँ कि भविष्य में यदि मूर्तियों को तोड़ने कोशिश हुई तो देश में क़ानून व्यवस्था की स्थिति इतनी ख़राब हो जाएगी कि राष्ट्रपति शासन लगाने की ज़रूरत पड़ जाएगी.

मायावती

इस अवसर पर मायावती ने अपनी उन आलोचनाओं का जवाब देने की कोशिश की जिनमें कहा जा रहा है कि वह अनावश्यक स्मारक और स्मृति प्रतीक बनाकर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर रही हैं.

कांशीराम ग्रीन गार्डन लखनऊ में एक जेल परिसर को ध्वस्त करके 195 एकड़ ज़मीन पर बनाया जा रहा है. शहर में यह बहुत ही महंगी जगह समझी जाती है. इस जेल परिसर में भारत के बहुत से महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने भी समय गुज़ारा था.

मायावती की विवादास्पद परियोजना को अदालत में चुनौती दी गई थी, हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले को बदल दिया था जिसमें इस जेल को तोड़कर यह स्मारक बनाने पर रोक लगाई गई थी.

यह मामला अब भी अदालत में चल रहा है और मायावती की विवादास्पद निर्माण परियोजनाओं पर एक मुक़दमे की सुनवाई शुक्रवार, 18 सितंबर को होने वाली है और कांशीराम ग्रीन गार्डन का शिलान्यास उससे एक दिन पहले यानी गुरूवार शाम को ही रखा गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर के शुरू में उत्तर प्रदेश सरकार को मुख्यमंत्री मायावती और उनके राजनीतिक गुरू कांशीराम की प्रतिमाओं के निर्माण पर रोक लगाने का आदेश दिया था.

अनेक स्थानों पर

उत्तर प्रदेश में मायावती और कांशीराम के अनेक स्मारक लगभग 750 एकड़ भूमि पर निर्माणाधीन हैं और यह ज़मीन बहुत की क़ीमती बताई जाती है.

मुख्यमंत्री मायावती ने इन परियोजनाओं का विवरण मीडिया में सार्वजनिक नहीं किया है, हालाँकि अनुमान के अनुसार इन स्मारकों के निर्माण पर 15 हज़ार करोड़ रुपए की रक़म ख़र्च की जाए, इसमें पुरानी इमारतों और ढाँचों को गिराना और नए निर्माणों पर ख़र्च शामिल है.

मायावती

मायावती का कहना है कि मौत के बाद प्रतिमाएँ लगाने की परंपरा पुरानी पड़ चुकी है

इन निर्माणाधीन स्मारकों में लगभग 100 पत्थर के हाथी, मायावती और उनके राजनीतिक गुरू कांशीराम की प्रतिमाएँ लगाई जाएंगी.

आलोचकों का कहना है कि मायावती इन परियोजनाओं के ज़रिए ख़ुद को और कांशीराम को दलितों के सबसे बड़े नेता डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के मुक़ाबले बड़ा नेता साबित करने की कोशिश कर रही हैं.

मायावती भारत के उपेक्षित वर्ग के लिए एक बड़ी नेता कही जाती हैं. इस उपेक्षित वर्ग को आज भी दलित कहा जाता है जबकि पहले इस वर्ग के अछूत समझा जाता था.

अलोचकों का आरोप है कि मायावती सिर्फ़ अपनी छवि को प्रोत्साहित करने में लगी हुई हैं लेकिन मायावती का आरोप है कि उनके विरोधी उनके ख़िलाफ़ साज़िश रच रहे हैं.

उत्तर प्रदेश देश के सबसे पिछड़े और ग़रीब प्रदेशों में से एक है जहाँ की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या ग़रीब है. राज्य में शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य के लिए समुचित सुविधाएँ और ढाँचा मौजूद नहीं है, यहाँ तक कि पीने का सुरक्षित पानी भी सबको उपलब्ध नहीं है.

राज्य के 71 में से 58 ज़िले इस वर्ष यानी 2009 में मानसून में बारिश कम होने की वजह से सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं.

मूर्ति और कल्याण

मायावती इन मूर्तियों और स्मारकों पर जो बेतहाशा धन ख़र्च कर रही हैं, उसे विपक्षी दलों ने शर्मनाक कहा है.

मीडिया का कहना है कि मायावती इतनी क़ीमती और इतनी बड़ी सरकारी ज़मीनों पर इस तरह के स्मारक बनाकर बहुत बड़ी भूलकर रही हैं जबकि यह धन उन ग़रीब लोगों के कल्याण के लिए ख़र्च किया जा सकता है जिनके वोट के ज़रिए मायावती सत्ता में आई हैं.

मायावती

मायावती ने 2007 के चुनाव में भारी बहुमत जीतकर सरकार बनाई थी

मायावती ने मई, 2007 में हुए चुनाव में भारी बहुमत से सरकार बनाकर अपने विरोधियों को चकित कर दिया था हालाँकि उनका प्रधानमंत्री बनने का सपना तब चकनाचूर हो गया जब वर्ष 2009 में हुए संसदीय चुनाव में उनकी बहुजन समाज पार्टी को अपेक्षित सीटें नहीं मिल सकीं.

भारत में ऐसी परंपरा है कि किसी बड़े व्यक्ति या राजनेता की मौत के बाद उसकी याद में उसकी मूर्ति या प्रतिमा लगाई जाती है लेकिन मायावती का कहना है कि यह मान्यता पुरानी हो चुकी है.

राजनेता मायावती पर आरोप लगे हैं कि वे अपने और अपने सहयोगियों की प्रतिमाओं पर भारी सरकारी रक़म ख़र्च करके सत्ता का दुरुपयोग कर रही हैं.

मायावती ने इन आरोपों को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया है कि यह दरअसल दलित और उपेक्षित जातियों के नेताओं के प्रति उच्च जातियों का पूर्वाग्रह है और उनके ख़िलाफ़ एक राजनीतिक षडयंत्र है.

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