किताब पर रोक से जसवंत दुखी

भारतीय जनता पार्टी से निकाले गए वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने अपनी किताब को गुजरात में प्रतिबंधित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

शिमला से दिल्ली लौटे जसवंत सिंह ने कहा कि किताब पर लगे प्रतिबंध से वे काफ़ी दुखी हैं. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “जिस दिन हम किताबों पर प्रतिबंध लगाना शुरु कर देंगे समझिए कि हम सोच पर रोक लगा रहे हैं.”

जसवंत सिंह की किताब 'जिन्ना: इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस' पर उठे विवाद के बाद भाजपा ने बुधवार को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके बाद गुजरात में किताब की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है.

कहा जा रहा है कि बिक्री पर रोक इसलिए लगाई गई क्योंकि पुस्तक में सरदार पटेल के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है और गुजरात सरकार मानती है कि 'सरदार पटेल भारत के बड़े नेता थे और गुजरात के महान सपूत थे और यदि उनका ज़िक्र अपमानजनक तरीक़े से होता है तो ये स्वीकार्य नहीं है.'

निष्कासन

जिस दिन हम किताबों पर प्रतिबंध लगाना शुरु कर देंगे समझिए कि हम सोच पर रोक लगा रहे हैं

जसवंत सिंह

भारतीय जनता पार्टी की शिमला में चिंतन बैठक चल रही है. इसी बैठक के शुरु होने से पहले बुधवार को पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मीडिया को बताया था कि जसवंत सिंह को भाजपा से निकाल दिया गया है.

जसवंत सिंह को ये जानकारी राजनाथ सिंह ने फ़ोन पर दी. जसवंत सिंह चिंतन बैठक में शामिल होने के लिए शिमला पहुँचे थे लेकिन उन्हें बैठक में आने से मना कर दिया गया था.

अपने निष्कासन के बाद जसवंत ने कहा था, “अफ़सोस है कि केवल एक किताब लिखने पर ही मुझे हनुमान से रावण बना दिया गया है.अच्छा होता यदि फ़ोन पर सूचित करने की जगह आडवाणी जी और राजनाथ जी मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस फ़ैसले की सूचना दे देते.”

जसवंत सिंह ने अपनी किताब में भारत के विभाजन के लिए मोहम्मद अली जिन्ना को पूरी तरह ज़िम्मेदार न ठहराकर इसके लिए वल्लभ भाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस को भी ज़िम्मेदार बताया है.

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