'जसवंत और आडवाणी की तुलना न करें'

अरुण जेटली, भाजपा नेता

भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा है कि जसवंत सिंह ने जो लिखा है, वो भाजपा की विचारधारा के बिल्कुल उलट है और अनुशासनहीनता है.

जसवंत सिंह की किताब के सामने आने के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से क्यों निकाला, इसपर दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि भाजपा के संविधान में स्पष्ट लिखा हुआ है कि पार्टी के संसदीय बोर्ड को अनुशासनहीनता वाले किसी भी मामले में फ़ैसला लेने और उसकी प्रक्रिया तय करने का पूरा अधिकार है.

उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह ने अपनी किताब में सरदार पटेल और मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में जो लिखा है वो पार्टी की मूल विचारधारा के बिल्कुल विपरीत है और एक बड़ी अनुशासनहीनता की तरह है.

अरुण जेटली ने यह भी कहा कि अगर जसवंत सिंह अपनी निजी राय रखना भी चाहते थे तो उन्हें ऐसा पार्टी की मुख्यधारा से अलग होकर कहना चाहिए था. पार्टी की सबसे अगड़ी पंक्ति में खड़े होकर पार्टी की ही विचारधारा के ख़िलाफ़ जाकर कैसे लिखा जा सकता है.

अरुण जेटली ने पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना के बारे में जो विचार व्यक्त किए थे, उनसे जसवंत सिंह की किताब में कही गई बातों की तुलना करके नहीं देखा जा सकता है.

संघ से कोई संबंध नहीं

उधर दिल्ली पहुँचकर जसवंत सिंह भी गुरुवार को पत्रकारों से रूबरू हुए. उन्होंने एकबार फिर पार्टी के फैसले पर दुख व्यक्त किया.

पर साथ-साथ वो पार्टी पर हावी हो रहे आरएसएस की ओर भी इशारा करने से नहीं चूके.

हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर अपने निष्कासन के फैसले के पीछे संघ को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया पर साफ़-साफ़ संघ से अपने दूर तक संबंध न होने की बात भी कही.

जसवंत सिंह

उन्होंने कहा, "मेरा संघ के साथ कोई भी संबंध नहीं रहा है. मैं सेना से प्रशिक्षित होकर और काम करके निकला हूँ जो किसी भी सूरत में संघ के प्रशिक्षणों से बेहतर है."

चिंतन बैठक के दौरान पार्टी से अपने निष्कासन के बाद जसवंत ने कहा था, "अफ़सोस है कि केवल एक किताब लिखने पर ही मुझे हनुमान से रावण बना दिया गया है. अच्छा होता यदि फ़ोन पर सूचित करने की जगह आडवाणी जी और राजनाथ जी मुझे व्यक्तिगत तौर पर इस फ़ैसले की सूचना दे देते."

विवाद

पिछले दिनों जसवंत सिंह की मोहम्मद अली जिन्ना पर आधारित किताब ने भारत के राजनीतिक गलियारों और ख़ासतौर पर भारतीय जनता पार्टी में हड़कंप मचा दिया था.

जसवंत सिंह ने अपनी किताब में लिखा है कि भारत के विभाजन के लिए जिन्ना नहीं, नेहरू और पटेल ज़िम्मेदार थे. उन्होंने यह भी कहा कि जिन्ना की एक ग़लत छवि भारतीय लोगों के सामने पेश की जाती रही.

पार्टी ने जसवंत की किताब से पल्ला ही नहीं झाड़ा, यह तक कहा कि पार्टी की विचारधारा का और पार्टी के लोगों का इस किताब से कोई वास्ता नहीं है. यह जसवंत सिंह की व्यक्तिगत राय पर आधारित है.

प्रतिक्रिया यहां तक भी नहीं रुकी. जसवंत सिंह की किताब 'जिन्ना: इंडिया, पार्टीशन, इंडिपेंडेंस' पर उठे विवाद के बाद भाजपा ने बुधवार को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके बाद गुजरात में किताब की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है.

कहा जा रहा है कि बिक्री पर रोक इसलिए लगाई गई क्योंकि पुस्तक में सरदार पटेल के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है और गुजरात सरकार मानती है कि 'सरदार पटेल भारत के बड़े नेता थे और गुजरात के महान सपूत थे और यदि उनका ज़िक्र अपमानजनक तरीक़े से होता है तो ये स्वीकार्य नहीं है.'

इससे पहले शिमला में चिंतन बैठक के दौरान जसवंत सिंह को पार्टी से निष्कासन की जानकारी राजनाथ सिंह ने फ़ोन पर दी थी. जसवंत सिंह चिंतन बैठक में शामिल होने के लिए शिमला पहुँचे थे लेकिन उन्हें बैठक में आने से मना कर दिया गया था.

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