राहुल ने निशाना साधा, माया भी बरसीं

रीता जोशी

मायावती ने कहा कि रीता जोशी का अपराध माफ़ करने योग्य नहीं है

उत्तर प्रदेश में रीता जोशी मुद्दे पर राजनीति गरमाई है और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मायावती पर तीखे प्रहार किए हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर सीधी टिप्पणी करते हुए कहा है कि वे रीता जोशी का गुस्सा समझ सकते हैं लेकिन जिस शब्दावली का इस्तेमाल हुआ उस पर उन्हें अफ़सोस है.

राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में विकास और ग़रीबों के लिए हो रहे कार्यों को आधार बनाते हुए मायावती पर निशाना साधा है.

इससे पहले शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने रीता जोशी मामले पर एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के सदस्यों को चेताया था और कहा है कि रीता जोशी का अपराध माफ़ करने योग्य नहीं है.

उधर रीता जोशी के मामले में शुक्रवार को मुरादाबाद की अदालत में सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण सोमवार तक टल गई है. वे पुलिस हिरासत में ही हैं.

ये विवाद तब पैदा हुआ जब रीता जोशी ने बलात्कार की शिकार बनी महिलाओं को राज्य सरकार की ओर से मुआवज़ा दिए जाने पर एतराज़ जताते हुए हाल में टिप्पणी की थी जिसके बाद राज्य की पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.

'ग़रीबों के लिए काम नहीं हो रहा'

मैं उनका (रीता जोशी का) गुस्सा समझ सकता हूँ लेकिन उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया उस पर मुझे अफ़सोस है. क्योंकि उत्तर प्रदेश में जो सरकार है वह उत्तर प्रदेश में काम करती नज़र नहीं आ रही है

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी

उत्तर प्रदेश में अमेठी पहुँचे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मैं उनका (रीता जोशी का) गुस्सा समझ सकता हूँ लेकिन उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया उस पर मुझे अफ़सोस है. क्योंकि उत्तर प्रदेश में जो सरकार है वह उत्तर प्रदेश में काम करती नज़र नहीं आ रही है."

उनका कहना था, "उत्तर प्रदेश की सरकार ग़रीबों के लिए काम नहीं कर रही है. नरेगा कार्यक्रम के तहत पैसा केंद्र सरकार से राज्य सरकार को भेज दिया गया है लेकिन लोगों ने बताया है कि एक महीने से पैसा उन्हें नहीं मिला है. यदि लोगों को बिजली नहीं मिलती और वे प्रदर्शन करते हैं तो पुलिस उन्हें पीटती है. कोई सामान्य सरकार ऐसा बर्ताव नहीं करती है."

उनका कहना था कि हर मुख्यमंत्री की प्राथमिकताएँ होती हैं और मायावती की भी प्राथमिकताएँ हैं. उनका कहना था, "मैं उनकी इस बात से सहमत नहीं कि मूर्तियाँ लगाना पहली प्राथमिकता है."

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में मूर्तियों और हाथियों की जगह तो है लेकिन विकास और ऊर्जा के लिए भी जगह होनी चाहिए. आपकी ऊर्जा की समस्या तब तक हल नहीं होगी जब तक लखनऊ में कांग्रेस की सरकार नहीं बनती. आपके पास तीन साल का समय है."

उनका कहना था, "अभी हमारा एक हाथ खुला हुआ है और दूसरा बंधा हुआ है. केंद्र सरकार विकास के लिए कई योजनाओं के तहत करोड़ों रुपए राज्य सरकार को देती है लेकिन ये पैसा आप तक पहुँचता ही नहीं है. इसका समाधान होना चाहिए."

ग़ौरतलब है कि रीता बहुगुणा जोशी के समर्थन में मुरादाबाद के सांसद और पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने मुरादाबाद में अपने सहयोगियों के साथ गिरफ़्तारी दी है.

मायावती के तीखे तेवर

मैं ये स्पष्ट करना चाहती हूँ कि रीता जोशी ने मेरे बारे में जो अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी की है, वह माफ़ करने योग्य नहीं है. इस मामले में क़ानूनी कार्रवाई चलती रहेगी

मुख्यमंत्री मायावती

शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने रीता जोशी मामले पर एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के सदस्यों को चेताया और कहा है कि रीता जोशी का अपराध माफ़ करने योग्य नहीं है.

मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि सोनिया गांधी ने मजबूर होकर इस मामले में खेद व्यक्त करने का बयान दिया था.

उनका ये भी कहना था, "मैं ये स्पष्ट करना चाहती हूँ कि रीता जोशी ने मेरे बारे में जो अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी की है, वह माफ़ करने योग्य नहीं है. इस मामले में क़ानूनी कार्रवाई चलती रहेगी."

उन्होंने इसके साथ-साथ कांग्रस के सदस्यों को भी चेताया. उनका कहना था, "वरुण गाधी की तरह रीता को भी कुछ समय के लिए चाहे ज़मानत मिल जाए लेकिन इससे इस महिला का अपराध कम नहीं होता.देर सवेर क़ानून के तहत उसे सज़ा ज़रूर मिलेगी. मैं कांग्रेस के लोगों को चेतावनी देना चाहती हूँ कि कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष के किए कृत्य को दबाने के लिए क़ानून को अपने हाथ में न लें, नहीं तो उनसे सख़्ती से निपटा जाएगा."

उनका कहना था कि यदि उन्होंने 15 जुलाई की रात को बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं को समझाया न होता तो वे पूरे देश में सड़कों पर उतर जाते और कांग्रेस के लोग इधर-उधर भागते नज़र आते.

मायावती का कहना था कि राजनीतिक दलों की विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग राय होना सामान्य बात है लेकिन अमर्यादित टिप्पणी करना उचित नहीं है.

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