BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
गुरुवार, 27 नवंबर, 2003 को 12:57 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
एड्स पर बीबीसी हिंदी के रेडियो कार्यक्रम

एचआईवी-एड्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बीबीसी हिंदी रेडियो ने विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए. भारत में इस बीमारी के शिकार लोगों की स्थिति और अन्य पहलुओं पर क्या है समाज का नज़रिया.

देश के अलग-अलग हिस्सों से विनीता द्विवेदी की रिपोर्टें...


बेंसन और बेंसी की कहानी

बेंसी और बेंसन

एड्स की बीमारी यूँ तो किसी को भी हो सकती है लेकिन जिन बच्चों को ये बीमारी माँ-बाप से विरासत में मिली हो उनका ये सवाल भी सही है कि इसमें उनकी क्या ग़लती है? ये कहानी है केरल के कोवलम ज़िले के कैथाकुज़ी गाँव की सात साल की बेंसी और पाँच साल के बेंसन की जो माँ-बाप की वजह से एड्स का शिकार हुए. इन बच्चों के साथ समाज का बर्ताव अच्छा नहीं रहा है...


कॉन्डम के इस्तेमाल से परहेज़

कॉन्डम के पैकेट

हाल में हुए एक सर्वेक्षण से ये पता चला है कि भारत में एड्सग्रस्त लोगों में से 80 प्रतिशत को ये रोग असुरक्षित यौन संबंधों से होता है. इसके बावजूद भारत में लोग आम तौर पर कॉन्डम के इस्तेमाल से कतराते हैं. भारतीय समाज में संतान रोकने के लिए भी कॉन्डम की जगह नसबंदी ही ज़्यादा पंसद की जाती है. आख़िर क्यों है ऐसा...



कमाटीपुरा की यौनकर्मियों की व्यथा

कमाटीपुरा की यौनकर्मी

आम तौर पर वेश्यालयों को एड्स फैलाने के केंद्र के रूप में देखा जाता है. ये धारणा क्यों है इसका पता मुंबई की यौनकर्मियों के सबसे बड़े केंद्र कमाटीपुरा से चला. आंध्र प्रदेश से आए कमाटी मज़दूरों के नाम पर बसा यह इलाक़ा उन्नीसवीं सदी के अंत तक यौनकर्मियों का सबसे बड़ा ठिकाना बन गया था...


सोनागाछी के वेश्यालयों में जागरूकता

सोनागाछी की यौनकर्मी

भारत में देहव्यापार के सबसे बड़े इलाक़े कोलकाता के सोनागाछी में यौनकर्मी महिलाओं की जागरूकता एड्स के ख़िलाफ़ उनकी लड़ाई में वरदान साबित हो रही है. ये महिलाएँ इस बात का प्रतीक बन गई हैं कि किस तरह जागरूक और संगठित होकर वे कॉन्डम के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकती हैं. सोनागाछी की यही कहानी...


एड्स-पीड़ित नवीन की मुश्किलें

एड्स

दिल्ली निवासी नवीन तीन वर्ष से एड्सग्रस्त हैं. माँ-बाप ने घर से निकाल दिया. भाई-भाभी बात नहीं करते. एक के बाद एक कई बीमारियाँ हो जाती हैं. दवा का ख़र्च बढ़ गया और बाहर निकलना बंद हो गया. अब तो बेटी को स्कूल में दाख़िला भी नहीं मिल रहा है क्योंकि उसके माँ-बाप को एड्स है. लोग किराए पर घर देने में भी आनाकानी करते हैं...


मज़दूरों और ड्राइवरों में जागरूकता कितनी

ट्रक चालक

एचआईवी-एड्स का वायरस कोई भेद नहीं करता है फिर वह चाहे पुरुष, महिला या बच्चे ही क्यों न हों. यानी अमीर-ग़रीब से लेकर अनपढ़ों तक सब इसका शिकार हो रहे हैं. मगर इससे ग्रस्त होने की सबसे ज़्यादा संभावना मानी जाती है मज़दूरों या अपना घर छोड़कर काम करने बाहर गए लोगों में. कितनी जागरूकता है उनमें...


एड्स के प्रति डॉक्टरों का रवैया

अस्पताल का दृश्य

एड्स की बीमारी ने भी भारतीय समाज के कई पहलुओं पर से पर्दा उठा दिया है, बहुत सी शर्मनाक परतें खोली हैं. इन्हीं में से एक है एड्स के रोगियों को नज़रअंदाज़ करते डॉक्टर. डॉक्टरी का काम शुरू करने के साथ ही कसम खाई जाती है कि हर ज़रूरतमंद का बिना शर्त और बिना भेदभाव इलाज करेंगे. मगर क्या ऐसा हो पा रहा है...


मुंबई का जेजे अस्पताल

डॉक्टर

ख़ून में एड्स के वायरस एचआईवी की जाँच हो जाने के बाद यह ज़रूरी होता है कि मरीज़ को सही जानकारी दी जाए और इलाज का तरीक़ा बताया जाए क्योंकि एचआईवी के रोगी को अक्सर अस्पताल जाना पड़ता है. इस तरह इलाज लंबा खिंचता है. मुंबई का ऐसा एक अस्पताल जहाँ बड़ी संख्या में एचआईवी एड्स के रोगी आते हैं...


नीम-हकीमों के चक्कर में लोग

नीम-हकीम

भारत में बहुत तरह की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ प्रचलित हैं और हर तरह की बीमारी के इलाज के लिए उनका सहारा लिया जाता है. मगर एड्स का इलाज किसी के पास नहीं है. फिर भी ग़रीब, अशिक्षित और अनजान लोग नीम-हक़ीमों के पास जाने से कतराते नहीं हैं. नतीजा ये कि इलाज के बजाए उनकी जेब खाली हो जाती है...


एंटी-रेट्रोवायरल दवाएँ

एड्स की दवा

एंटी रेट्रोवायरल दवाएँ एचआईवी वायरस के असर को कम कर सकती हैं. ये दवाएँ वायरस को शरीर में फैलने से रोकती हैं और इससे मौत को न केवल वर्षों के लिए टाला जा सकता है बल्कि इससे रोगी की तकलीफ़ भी कम होती है. मगर भारत जैसे विकासशील देशों में ये दवा मुफ़्त उपलब्ध नहीं है और क़ीमत काफ़ी है...


बिहार की एड्स पीड़ित एक महिला की कहानी

एड्स पीड़ित

एड्स से जुड़ी कई ऐसी कहानियाँ हैं जो दकियानूस समाज के चेहरे पर पड़े नक़ाब को हटाती हैं. ऐसी ही एक कहानी है एक महिला की जो दुनियावालों के डर की वजह से अपना नाम तक बताने को राज़ी नहीं हैं. यही नहीं उन्हें अपनी नन्ही सी बच्ची को अपने से मीलों दूर रखना पड़ रहा है, बच्ची भी एड्स से ग्रस्त है...


एड्सग्रस्त समलिंगी

बी शेखर

अमरीका में 1980 के दशक में समलैंगिक पुरुषों में सबसे पहले एड्स की बीमारी पाई गई और कुछ समय तक यही माना जाता रहा कि यह केवल समलैंगिकों की बीमारी है. मगर धीरे-धीरे सच्चाई सामने आई. भारत में समलैंगिक संबंधों को मान्यता नहीं दी जाती तो ऐसे में एड्स जागरूकता की कौन कहे...


एड्स पीड़ित महिला तमिल की कहानी

ए तमिल

कहते हैं कि औरतों में पुरुषों से कहीं अधिक सहनशक्ति होती है और ज़िंदगी कई बार ऐसे वाकये पेश भी करती है. ऐसे में ए तमिल एक ऐसी महिला हैं जिनके जीवन ने उनकी कड़ी परीक्षा ली है. एड्स ने उनके पति और बच्चे के साथ ही पूरे परिवार को छीन लिया. माँ-बाप तक ने उनका साथ नहीं दिया. उनकी हिम्मत की दास्तान...


 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
 
 
इंटरनेट लिंक्स
 
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
 
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>